पटना , मार्च 30 -- बिहार में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर तेजी से बदल रही है।
अब मुखिया पति के हस्तक्षेप या उनके स्तर से शासन करने जैसी बातें पुरानी हो गई हैं। महिला मुखियाएं अब न केवल अपनी पंचायतों का कुशल नेतृत्व कर रही हैं, बल्कि विकास के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं। उनकी प्रेरणादायक कहानियां अन्य महिलाओं और युवतियों को नया आत्मविश्वास प्रदान कर रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है गोपालगंज जिले की जादोपुर दुखहरण पंचायत की मुखिया रामावती देवी की। वे अपनी मेहनत, लगन और कुशल नेतृत्व से न केवल अपनी पंचायत में बल्कि पूरे जिले में सराहनीय उदाहरण बन गई हैं।
रामावती देवी गांव-गांव घूमकर लोगों की समस्याएं सुनती हैं और उनका त्वरित समाधान करती हैं। विशेष रूप से महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को वे प्राथमिकता के आधार पर निपटाती हैं। यह पंचायत बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है, जहां मानसून के दौरान कई चुनौतियां सामने आती हैं। उन्होंने अपनी पंचायत में सड़कों के निर्माण के अलावा बिजली, नल-जल योजना, सोलर लाइटें और छठ घाटों का विकास कराया है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी उन्होंने उल्लेखनीय काम किया है। जीविका स्वयं सहायता समूहों से महिलाओं को जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास कर रही हैं। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में वे सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। रामावती देवी ग्राम सभाओं, सरकारी बैठकों और विकास से जुड़े सभी फैसलों में खुद सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। वे मानती हैं कि महिलाओं को आरक्षण मिलने के बाद ही हमें काम करने का असली मौका मिला। अब हम न सिर्फ खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि पूरे गांव का विकास भी सुनिश्चित कर रही हैं।
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