पटना , दिसंबर 04 -- बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राज्य के औद्योगिक विकास और निवेश को गति देने के लिए दूरदर्शी पहल के तहत 'उद्योग वार्ता' की शुरुआत की है। यह पहल निवेशकों को सीधे उच्च-स्तरीय सरकारी अधिकारियों से जोड़कर उनकी समस्याओं का त्वरितसमाधान सुनिश्चित करेगी। निवेशक बिना किसी अपॉइंटमेंट के निर्धारित समय पर सीधे मुख्य सचिव से मिल पाएंगे ।
'उद्योग वार्ता' अब प्रत्येक गुरुवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 01 बजे तक, मुख्य सचिव श्री अमृत की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी।
"उद्योग वार्ता" बिहार में निवेश करने के इच्छुक या उद्योग स्थापित करने के दौरान किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना कर रहे सभी निवेशकों के लिए एक समर्पित 'वन-स्टॉप सॉल्यूशन' साबित होगा। अगले सप्ताह से, बाहरी निवेशकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, यह बैठक पटना हवाईअड्डा के समीप स्थित वायुयान संगठन निदेशालय में आयोजित की जाएगी।
'उद्योग वार्ता' के पहले दिन ही देश-विदेश के कई प्रमुख निवेशकों ने बिहार में निवेश करने के लिए गहरी रुचि दिखाई। इन निवेशकों का मुख्य उद्देश्य अपने राज्य के लिए योगदान देना और पलायन की समस्या को दूर कर 'बिहार वापसी' को संभव बनाना था। उनका मानना था कि बिहार में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, और यदि यहाँ उद्योगों की संख्या बढ़ती है, तो युवाओं के लिए रोज़गार के व्यापक अवसर सृजित होंगे।
मुख्य सचिव श्री अमृत ने निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'उद्योग वार्ता' राज्य सरकार को अच्छे और गंभीर निवेशकों के साथ सीधे काम करने का अवसर देगी।
मुख्य सचिव ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि सरकार की ओर से उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि निवेश को बढ़ावा देने के लिए किसी भी प्रकार की नई नीति लानी पड़ेगी या पुरानी नीतियों में संशोधन की आवश्यकता होगी, तो राज्य सरकार बिना किसी विलंब केउसका समाधान करेगी।बिहार सरकार, राज्य को सिर्फ कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि उद्योगों , विशेष रूप से आईटी और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों के एक केंद्र (टेक हब) के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। 'उद्योग वार्ता' का शुभारंभ इसी दिशा में एक मील का पत्थर है, जो यह सुनिश्चितकरेगा कि बिहार देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए।
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