विनय कुमार सेझाझा(जमुई), नवंबर 08 -- ारखंड की सीमा से सटे जमुई जिले में बिहार के मिनी शिमला के नाम से मशहूर सिमुलतला को अपनी कोख में समेटे झाझा विधानसभा क्षेत्र इन दिनों चुनावी गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है, जहाँ एनडीए और महागठबंधन के उम्मीदवार एक दुसरे को पटखनी देने की फिराक में मैदान में उतरे हैं।
वर्ष 2025 का झाझा विधानसभा चुनाव भी काफी दिलचस्प नजर आ रहा है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने जहां बिहार सरकार के पूर्व मंत्री दामोदर रावत पर एक बार फिर विश्वास दिखाया है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी पूर्व केंद्रीय मंत्री जय प्रकाश नारायण यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है।
इन दोनों के बीच यहां सीधा मुकाबला है, लेकिन जन सुराज पार्टी के डॉक्टर नीलेन्दु दत्त मिश्रा , बहुजन समाज पार्टी के शिवराज यादव और और निर्दलीय मोहम्मद इरफान समेत कुल नौ उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है। वर्ष 2020 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर जनता दल यूनाइटेड के दामोदर रावत विजयी हुए थे। दामोदर रावत को कुल 76 हजार 9 सौ 72 वोट मिले थे, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार राजेंद्र प्रसाद दूसरे नंबर पर रहे थे, जिन्हें 75 हजार 2 सौ 93 वोट मिले थे और श्री प्रसाद महज 1 हजार 6 सौ 79 वोटों के अंतर से पराजित हुए थे। लेकिन इस बार राजद ने राजेंद्र प्रसाद को टिकट न देकर जय प्रकाश नारायण यादव को उम्मीदवार बनाया है। श्री यादव की इस मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में जदयू के उम्मीदवार से अक्सर कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। झाझा एक जनरल सीट है जिसका ज्यादातर इलाका ग्रामीण क्षेत्रों से मिलकर बना है। जहां कुल तीन लाख 38 हजार 6 सौ 67 मतदाता हैं। इनमें से अनुसूचित जातियों की जनसख्या करीब 15.85 फीसदी, अनुसूचित जनजातियों की 4.42 फीसदी और मुस्लिम समुदाय के लगभग 11.2 फीसदी मतदाता है।
झाझा विधानसभा क्षेत्र से 1952 में कांग्रेस के चंद्रशेखर सिंह, 1957 में दो विधायक कांग्रेस के भागवत मुर्मू और चंद्रशेखर सिंह , 1962 में सोशलिस्ट पार्टी के श्रीकृष्ण सिंह, 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के शिवनंदन झा, 1969 में कांग्रेस के चंद्रशेखर सिंह, 1972 में सोशलिस्ट पार्टी के शिवनंदन झा, 1977 में जनता पार्टी के शिवनंदन झा, 1980 में कांग्रेस के शिवनंदन यादव, 1985 में कांग्रेस के शिवनंदन यादव,1986 में कांग्रेस के डॉ.रविंद्र यादव,1990 में जनता दल के शिवनंदन झा ,1995 में कांग्रेस के डॉ.रविंद्र यादव 2000 में समता पार्टी के दामोदर रावत, 2005 फरवरी में जदयू के दामोदर रावत,2005 अक्टूबर में जदयू के दामोदर रावत, 2010 में जदयू के दामोदर रावत 2015 में भारतीय जनता पार्टी के डॉ.रविंद्र यादव और वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के दामोदर रावत चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। वर्ष 1957 के विधानसभा चुनाव में झाझा दो सदस्यीय क्षेत्र था इसलिए एक आरक्षित वर्ग के और एक सामान्य वर्ग के विधायक चुने गए थे। इस क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीतने वाले चंद्रशेखर सिंह बाद में बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी बने थे।
इस बार 2025 का चुनावी समर भी कुछ वैसा ही दिखाई पड़ रहा है और जातीय समीकरण को साधने में हर प्रत्य़ाशी लगा हुआ रहा है। इन दिनों झाझा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल गरमा गया है। विकास के मुद्दों के साथ जातीय समीकरणों पर नेता जोर दे रहे हैं। विभिन्न समुदाय अपने-अपने तरीके से समीकरण साधने में लगे हैं।
देखना यह है कि झाझा की गद्दी पर फिर दामोदर रावत की वापसी होगी या जनता किसी दूसरे नेता पर विश्वास जताएगी। इस क्षेत्र में 11 नवंबर को वोट डाले जाएगें और 14 नवंबर को मतपेटी खुलने के बाद झाझा के नये प्रतिनिधि का एलान होगा। फिलहाल सभी प्रत्य़ाशी अपनी जीत की रणनीति बनाने में जुटे हैं और अंतिम क्षणों तक जनसंपर्क के माध्यम से जनता को लुभाने की कोशिश जारी है।
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