, Feb. 15 -- आचार्य राकेश झा ने बताया कि महाशिवरात्रि पर आज रात्रि 07:40 बजे तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा इसके बाद शिव के प्रिय श्रवण नक्षत्र विद्यमान होगा। ये दोनों ही नक्षत्र भगवान शिव के प्रिय नक्षत्र है। ऐसे शुभ योग में उमा-महेश्वर की अराधना बहुत ही फलदायी होगी। श्रद्धालु व्रत, पूजा और पाठ के साथ जलाभिषेक व रुद्राभिषेक कर शिव-पार्वती की कृपा पाएंगे I चारों पहर में भोलेनाथ की विधिवत पूजा होगी। श्रद्धालु पूजा के बाद ॐ नमः शिवाय, हर हर महादेव, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रुद्राष्टक, शिव पंचाक्षर, शिव तांडव, लिंगाष्टक, बिल्वाष्टक, शिव महिम्न स्त्रोत का पाठ कर अपने आराध्य को प्रसन्न करेंगे।

ज्योतिषी राकेश झा ने सूर्य पुराण के हवाले से कहा कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव पृथ्वीलोक पर भ्रमण करने निकलते है, इसीलिए इस दिन पूजन से सालभर के शिवरात्रि के समान पुण्य मिलता है I शिवरात्रि का पूजा करने से श्रद्धालुओं को एक हजार अश्वमेघ यज्ञ तथा सैकड़ों वाजपेयी यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन यदि मनोयोग से भगवान शिव की आराधना की जाए तो भक्तों की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। शिव इतने भोले हैं कि यदि कोई अनायास भी शिवलिंग की पूजा कर दे तो भी उसे कृपा प्राप्त हो जाती है। यही कारण है कि भगवान शिव शंकर को भोलेनाथ भी कहा गया है।राजधानी पटना में छोटे-बड़े सभी शिव मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। शिवालयों में अखंड कीर्तन, जलाभिषेक और रूद्राभिषेक का अनुष्ठान भी हो रहा है। बिहार में भगवान शिव के ऐसे कई ऐतिहासिक मंदिर हैं जहां उनके दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता हैं।

माना जाता है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने से कष्टों से भी मुक्ति मिलती है। हर ओर बम बम भोले के जयकारे लग रहे हैं। किशनगंज में हरगौरी मंदिर, बांका के कुशेश्वरनाथ महादेव मंदिर,सीवान के सोहगरा धाम, मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर, गया के प्रपिता महेश्वर मंदिर, सोनपुर के बाबा हरिहर नाथ मंदिर, दरभंगा के कुशेश्वरस्थान, समस्तीपुर के थानेश्वर मंदिर, मधेपुरा में सिंहेश्वर स्थान, राजधानी पटना के खाजपुरा शिवमंदिर समेत बिहार के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालु भक्ति भाव से पूजा अर्चना कर रहे हैं। शिवालयों में भक्ति गीतों पर लोग जमकर झूम रहे हैं।

राज्य के कई स्थानों पर आज के दिन भोलेनाथ की बारात और झांकी निकालने की भी परंपरा है। इस अवसर पर लोग तरह-तरह का वेशभूषा धारण करते हैं। इस पर्व में भगवान शिव पक्ष के बाराती में शामिल श्रद्धालु सामान्य भोजन का सेवन करते हैं जबकि मां पार्वती पक्ष के लोग निराहार रहते हैं। भक्तों की भीड़ के मद्देनजर सभी मंदिरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस के बड़े अधिकारी खुद सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।

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