, Jan. 30 -- कार्यशाला में एक्विफर की पहचान, भूजल सम्भाव्यता आकलन, कृत्रिम पुनर्भरण तकनीक, जल संरक्षण उपाय, जल उपयोग दक्षता, डेटा आधारित योजना निर्माण और सतत भूजल प्रबंधन विषयों पर चर्चा की गई।

लघु संसाधन विभाग की इस कार्यशाला में अभियंता प्रमुख सुनील कुमार ने पीपीटी के माध्यम से राज्य में भूगर्भ जलस्तर की स्थिति और जलस्तर को रिचार्ज करने वाली परियोजनाओं पर प्रकाश डाला।

सेंट्रल वॉटर बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉ. दीपांकर साहा ने बिहार और दूसरे राज्यों में भूगर्भ जलस्तर की स्थिति पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि बिहार के कुछ जिलों को छोड़ दिया जाय तो यहां भूगर्भ जलस्तर काफी ठीक है। भविष्य की समस्याओं से निपटने की दिशा में कारगर तरीकों के प्रति भी लोगों को उन्होंने जागरूक किया। उन्होंने कहा कि दोहन के अनुपात में भूगर्भ जलस्तर रिचार्ज नहीं किया जा रहा। इस वजह से कई राज्य क्रिटिकल श्रेणी में आ चुके हैं।

श्री साहा ने कहा कि वैश्विक भूजल निष्कर्षण में भारत चीन और अमेरिका जैसे देश से भी आगे है। भूगर्भ जलस्तर रिचार्ज करने के लिए ठोस कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भूगर्भ जलस्तर के तेजी से गिरने के पीछे प्रमुख वजह खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले जल पर नियंत्रण नहीं किया जाना है।

कार्यशाला में सेंट्रल वाटर बोर्ड, मध्य पूर्वी क्षेत्र पटना के क्षेत्रीय निदेशक राजीव रंजन शुक्ला, लघु संसाधन विभाग की अपर सचिव संगीता कुमारी, एनआइटी पटना से एसोसिएट प्रोफेसर रोशनी, पटना यूनिवर्सिटी से भावुक शर्मा, आईआईटी पटना से ओम प्रकाश, स्कॉलर, व्याख्याता और प्राध्यापक मौजूद थे।

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