, March 9 -- इस अवसर पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एटीएम की तरह कार्य करता है, जिससे किसानों को आवश्यकता के समय तुरंत आय प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय तथा केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा थिंक टैंक के रूप में कार्य करेंगे और वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

उन्होंने बताया कि बकरी के दूध का विपणन सुधा के माध्यम से किए जाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

श्री अशोक ने बताया कि गोट चीज अत्यंत पौष्टिक होने के साथ-साथ बाजार में काफी महंगा उत्पाद है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में गोट फेडरेशन के गठन की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जिले में गोट स्पेशलिस्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिन्हें मथुरा स्थित संस्थान में विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार को पीपीआर रोग मुक्त राज्य बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में बकरी पालन से जुड़े व्यवसाय में राज्य के 27 लाख से अधिक किसान संलग्न हैं, जिनमें महिलाओं की सक्रिय और महत्वपूर्ण भागीदारी देखने को मिलती है।

गौरतलब है कि आज जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक चुनौती बन चुका है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसी परिस्थितियाँ कृषि एवं पशुपालन दोनों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में हमें जलवायु अनुकूल बकरीपालन एवं प्रबंधन अपनाने की आवश्यकता है।

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