, April 22 -- मेला में स्थानीय वेंडरों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। उनके द्वारा आश्वस्त किया गया कि आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत निर्धारित समयावधि में सोलर पैनल का अधिष्ठापन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, करारनामा अवधि के अंतर्गत सात वर्षों तक निःशुल्क मरम्मत एवं रख-रखाव की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। सहरसा के जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने कहा कि इस योजना को जन जन तक पहुंचाई जाय तथा अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं को विशेष रूप से सोलर अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल बिजली बिल में कमी लाती है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस ऋण की अदायगी शहरी क्षेत्रों में 4 से 5 वर्षों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 7 से 8 वर्षों की अवधि में की जा सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है। उपभोक्ता अपनी बिजली खपत के अनुसार सोलर पैनल की क्षमता का चयन कर सकते हैं। 150 यूनिट तक की खपत के लिए एक किलोवाट, 300 यूनिट तक के लिए दो किलोवाट तथा 300 यूनिट से अधिक के लिए तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता उपयुक्त है। सोलर पैनल से उत्पादित बिजली का उपयोग घरेलू कार्यों में किया जा सकता है तथा अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर बिजली बिल में समायोजन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। सोलर पैनल के लिये प्रति किलोवाट लगभग 100 वर्गफुट छत की आवश्यकता होती है तथा उचित रख-रखाव के साथ सोलर पैनल लगभग 25 वर्षों तक सुचारु रूप से कार्य करते हैं।

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