, Feb. 20 -- इस अवसर पर जीविका की अपर कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा ने उपस्थित पदाधिकारियों, आंतरिक समिति के सदस्यों एवं अन्य प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यस्थल पर लैंगिक सम्मान, समानता एवं सुरक्षा की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति केवल योजनाओं और कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि उसके कार्यस्थल के वातावरण से निर्धारित होती है। एक सुरक्षित, सम्मानजनक एवं संवेदनशील कार्यस्थल न केवल कर्मचारियों के आत्मविश्वास और कार्यक्षमता को बढ़ाता है, बल्कि संस्थागत विकास की मजबूत आधारशिला भी बनता है।

श्रीमती शर्मा ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना तथा किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव, उत्पीड़न या असहज वातावरण को समाप्त करना प्रत्येक संस्था की नैतिक एवं कानूनी जिम्मेदारी है। इस संदर्भ में उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पॉश अधिनियम) के प्रभावी क्रियान्वयन की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि सुरक्षित और समान अवसर प्रदान करने वाले कार्यस्थल के निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि जीविका अपने मानव संसाधन को लैंगिक रूप से संवेदनशील बनाने, जागरूकता बढ़ाने तथा संस्थान में सम्मानजनक कार्य संस्कृति विकसित करने के लिये निरंतर प्रयासरत है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत पॉश अधिनियम-2013 के प्रावधानों, आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका एवं जिम्मेदारियों, शिकायत निवारण की प्रक्रिया तथा अनुपालन संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। जेंडर विशेषज्ञ गुंजन बिहारी एवं नोडल ऑफिसर अंकिता कश्यप ने उपस्थित समूह को व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से विषयों की बारीक जानकारी दी।

इस अवसर पर जीविका के निदेशक, राम निरंजन सिंह, निदेशक (उद्यम), विनय कुमार राय सहित विभाग के वरीय पदाधिकारी, परियोजना प्रबंधक, आंतरिक समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को सुरक्षित, समान और सम्मानजनक कार्यस्थल के निर्माण के लिये सक्रिय भूमिका निभाने के आह्वान के साथ किया गया।

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