, March 19 -- श्री कुमार ने निरीक्षण के क्रम में अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि गंगा तट पर अवस्थित इत्त कष्टहरणी घाट के आसपास के क्षेत्रों को भी विकसित कराएं, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अनुष्ठान एवं स्नान करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
गौरतलब है कि कष्टहरणी घाट बिहार के मुंगेर जिला में गंगा नदी के किनारे स्थित एक अत्यंत प्राचीन और धार्मिक स्थल है। मान्यताओं के अनुसार, यहीं स्नान करने से शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। रामायण काल में, ताड़का वध के बाद भगवान राम और लक्ष्मण ने यहां गंगा स्नान कर नारी हत्या के पाप से मुक्ति पाई थी। यह उत्तरवाहिनी गंगा तट, दानवीर कर्ण से भी जुड़ा है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब भगवान श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि वशिष्ठ के साथ आश्रम जा रहे थे, तब उन्होंने राक्षसी ताड़का का वध किया था। इसके बाद, उन्होंने मुंगेर में इसी स्थान पर विश्राम और स्नान किया, जिसे आज कष्टहरणी घाट कहा जाता है। मुंगेर में गंगा नदी उत्तर दिशा की ओर (उत्तर-वाहिनी) बहती है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अंग प्रदेश के राजा कर्ण भी रोजाना यहां गंगा स्नान करने आते थे और मां चंडिका की पूजा करते थे। यह घाट अपने शानदार सूर्यास्त और सूर्योदय के दृश्यों के लिए भी जाना जाता है, यह भक्तों के लिए एक स्वर्ग के समान है।
श्री कुमार ने मुंगेर के भगत सिंह चौक के समीप डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग अंतर्गत मुंगेर पशु औषधालय कैम्पस में जिला स्तरीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र का शिलापट्ट अनावरण कर एवं फीता काटकर उद्घाटन किया। उन्होंने उद्द्घाटन के क्रम में जिला स्तरीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र के नवनिर्मित भवन का निरीक्षण कर प्रशिक्षण सह सभाकक्ष, पूछताछ काउंटर का जायजा लिया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित