, April 9 -- समीक्षा के दौरान सभी कार्यपालक पदाधिकारियों एवं कार्यपालक अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जल निकासी के लिए पंप सेट पर अत्यधिक निर्भरता कम की जाए तथा ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे वर्षा के दौरान स्वतः जल निकासी सुनिश्चित हो सके। जिन क्षेत्रों में नाले जीर्ण-शीर्ण स्थिति में हैं या उनकी क्षमता कम हो चुकी है, वहां अल्पकालीन निविदा जारी कर एक महीने के भीतर मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वर्षा के समय पानी के सहज बहाव में किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो। इसके लिए मैनहोल की लेवलिंग दुरुस्त रखने, कैचपिट की नियमित सफाई करने तथा नालों की समय पर उड़ाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

सभी अंचलों द्वारा संभावित जलजमाव वाले क्षेत्रों एवं कारण की पहचान कर प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। बैठक में उन सभी स्थानों के लिए रणनीति बनाने एवं आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया।

जल जमाव की स्थिति में जल निकासी के लिए पंपों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। पटना नगर निगम के सभी अंचलों में कुल 166 डीजल चालित पंप सेट तथा 86 विद्युत चालित पंप सेट उपलब्ध हैं। मुख्यालय की ओर से सभी खराब पड़े पंप सेटों की मरम्मत कराने और ऑपरेटरों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करते हुए शनिवार को उनका ट्रायल रन कराने का निर्देश दिया गया है।

नगर निगम मुख्यालय की ओर से मैनहोल, कैचपिट एवं नाला उड़ाही के लिए सभी अंचलों को एक-एक लाख रुपये की राशि आवंटित की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इस राशि का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने में किया जाए। साथ ही नाला उड़ाही, सफाई एवं जल निकासी कार्यों में लगे वाहनों और मशीनों की एक सप्ताह के भीतर मरम्मत कर उन्हें पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए तथा आवंटित राशि के उपयोग से संबंधित यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट समय पर मुख्यालय को उपलब्ध करायी जाए।

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