, Jan. 19 -- श्री तिवारी ने कहा कि डिजिटल युग की पत्रकारिता ने परम्परागत पत्रकारिता के आर्थिक मॉडल को भी हिला दिया है। उन्होंने कहा कि पहले समाचार संगठन विज्ञापनों और ग्राहकों की सदस्यता के माध्यम से अपनी आय अर्जित करते थे। लेकिन अब अधिकांश विज्ञापन राजस्व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे गूगल और फेसबुक की ओर चला गया है।

विषय प्रवेश करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रविभूषण चतुर्वेदी ने कहा कि परम्परागत पत्रकारिता में बदलाव होना ही था, पर ये बदलाव सकारत्मक हो या नकारात्मक हो ये नई पीढ़ी को समझना होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल पत्रकारिता ने पाठकों के समाचार उपभोग के तरीके को भी बदला है। आज के पाठक छोटी, आकर्षक और दृश्यात्मक सामग्री को प्राथमिकता देते हैं। लंबे, गहन विश्लेषणात्मक लेखों की माँग कम हो रही है।

सेमिनार को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार गंगेश मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता कभी वृद्ध नही होती वो बदलती रहती है।सूचना,उपयोगिता और रोचकता ये तीन पहले भी थे और आज के डिजिटल युग मे भी उसी तरह से विद्यमान है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए परम्परागत पत्रकारिता को अपनी विश्वसनीयता को और मजबूत करना होगा।

वरिष्ठ पत्रकार डॉ कृष्ण कुमार ने कहा कि लोकतंत्रीकरण जहाँ सकारात्मक है, वहीं इसके कई नकारात्मक प्रभाव भी हैं।परम्परागत पत्रकारिता में समाचारों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सख्त सम्पादकीय प्रक्रियाएँ और तथ्य-जाँच के मानक होते थे। उन्होंने कहा कि समाचार संगठनों में प्रशिक्षित पत्रकार और सम्पादक यह सुनिश्चित करते थे कि जनता तक केवल सत्यापित और सटीक जानकारी ही पहुँचे। इसके विपरीत, सोशल मीडिया पर सूचनायें बिना किसी सम्पादकीय निगरानी के प्रसारित होती हैं। यहाँ झूठी खबरें (फेक न्यूज़), अफवाहें और गलत सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं।

इस मौके पर अतिथियों ने स्वर्गीय रामगोविन्द प्रसाद गुप्ता के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।सेमिनार का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत डॉ. ए.डी.एन सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार गुप्ता ने किया वहीं, धन्यवाद ज्ञापन पत्रकार प्रमोद गुप्ता ने किया।

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