पटना , जनवरी 13 -- बिहार मंत्रिमंडल ने मंगलवार को बिहार और झारखंड के बीच लंबे समय से लंबित सोन नदी जल-बंटवारा विवाद के निपटारे सहित कुल 41 प्रस्तावों को हरी झंडी दी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव (कैबिनेट) अरविंद चौधरी ने आज यहां संवाददाताओं को बताया कि करीब 53 वर्षों बाद बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी जल-बंटवारा विवाद के निपटारे को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।
श्री चौधरी ने बताया कि वर्ष 1973 में हुए बाणसागर समझौते के तहत तत्कालीन अविभाजित बिहार को 7.75 मिलियन एकड़-फीट (एमएएफ) पानी का अधिकार था। वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन के बाद से ही झारखंड दोनों राज्यों के बीच जल हिस्सेदारी की मांग करता रहा। इस विवाद का समाधान नहीं होने के कारण बिहार में इंद्रपुरी जलाशय परियोजना को वर्षों तक मंजूरी नहीं मिल सकी। जल-बंटवारे के अंतिम सूत्र के तय होने के बाद अब दोनों राज्यों ने सहमति जताई है कि अविभाजित बिहार के 7.75 एमएएफ हिस्से में से बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2.00 एमएएफ पानी मिलेगा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव बताया कि इस संबंध में बिहार और झारखंड के बीच हस्ताक्षरित किए जाने वाले एकरारनामा प्रारूप को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से लंबे समय से लंबित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का मार्ग प्रशस्त होगा और भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया और अरवल सहित कई जिलों में अस्थायी सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
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