, Feb. 27 -- स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि एचपीवी टीका पूरी तरह सुरक्षित और असरदार है। 160 देशों ने एचपीवी टीकाकरण को अपने नेशनल टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत के राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह ने इसे प्रमाणित किया है। वर्तमान में यह टीका दुनिया के 160 देशों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है और दिसंबर 2022 तक 50 करोड़ से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी हैं। यह टीका उन वायरस वेरिएंट्स (16 और 18) के खिलाफ 93 प्रतिशत तक प्रभावी है, जो भारत में 83 प्रतिशत कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। यह टीका न केवल जान बचाता है, बल्कि परिवारों को भविष्य में होने वाले भारी-भरकम इलाज के खर्च और मानसिक प्रताड़ना से भी सुरक्षित रखता है।

चूंकि इस कैंसर के शुरुआती चरण में जननेंद्रियों से असामान्य रक्तस्राव या दर्द जैसे कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। बीमारी बढ़ने पर ही वजन कम होना, पैरों में सूजन या पीठ दर्द जैसे संकेत मिलते हैं। ऐसे में बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। विशेषज्ञों का मानना है कि 35 से 45 वर्ष की आयु में जब महिलाएं अपने परिवार और नौकरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सहारा होती हैं, तब यह बीमारी उन्हें अपनी चपेट में लेती है। टीकाकरण के माध्यम से इस जोखिम को लगभग समाप्त किया जा सकता है।

इस महाभियान को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग डिजिटल प्लेटफॉर्म 'यू-विन' का सहारा ले रहा है। अभिभावक अपनी बेटियों का पंजीकरण घर बैठे या सीधे टीकाकरण केंद्र पर जाकर करा सकते हैं और टीकाकरण के बाद डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्राप्त कर सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसके लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य होगी। हालांकि, टीके के बाद मामूली दर्द या हल्का बुखार जैसे सामान्य लक्षण दिख सकते हैं, जो दो-तीन दिनों में स्वतः ठीक हो जाते हैं। बिहार के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर पटना जैसे शहरी इलाकों तक इस अभियान को मिशन मोड में चलाया जा रहा है ताकि राज्य की कोई भी बेटी इस सुरक्षा चक्र से वंचित न रहे।

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