पटना , जनवरी 06 -- बिहार में पर्यटकीय महत्व रखने वाले 24 प्राकृतिक स्थलों को वन एवं पर्यावरण संरक्षण विभाग ने चिन्हित कर उन्हें जैव विविधता एवं प्राकृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने के साथ 'ईको टूरिज्म का दर्जा' दिया गया है।
जिन 24 स्थलों इको टूरिज्म सर्किट में शामिल किया गया है, उनमे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, अमवा मन झील, उदयपुर वन्यजीव अभ्यारण्य, विक्रमशिला गंगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य, भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण्य, राजगीर नेचर एवं जू सफारी, घोड़ा कटोरा, पांडु पोखर, ककोलत, गढ़ी बांध, नागी एवं नकटी बांध, इंद्रपुरी बैराज, मांझर कुंड और धुआं कुंड, तुतला भवानी जलप्रपात, कशिश जलप्रपात, बांका ओढ़नी बांध, कैमूर वन्यजीव अभ्यारण्य, करकटगढ़ जलप्रपात, कांवर झील, कुशेश्वर स्थान पक्षी अभ्यारण्य, गौतम बुद्ध वन्यजीव अभ्यारण्य, संजय गांधी जैविक उद्यान एवं इको पार्क (पटना) शामिल हैं।
पर्यटन विभाग इन स्थलों के अतिरिक्त नये संभावित प्राकृतिक स्थलों की पहचान कर उन्हें इको टूरिज्म सर्किट में शामिल करने की दिशा में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में नए प्राकृतिक स्थलों की खोज कर उन्हें इको टूरिज्म के रूप में विकसित करने और इको टूरिज्म सर्किट को और अधिक मजबूत करने का निर्देश दिया था। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना और राज्य की प्राकृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभागीय स्तर पर मंथन शुरू हो गया है और नये स्थलों की पहचान कर वहां पर्यटकीय सुविधाओं के विकास और उन्हें इको टूरिज्म सर्किट से जोड़ने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
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