विनय कुमारसिकंदरा (जमुई), नवंबर 07 -- बिहार की सिकंदरा विधानसभा सीट जमुई जिले की चार सीटों में से एक हैं।

सिकंदरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है तथा इसमें खैरा, सिकंदरा और अलीगंज तीन प्रखंड क्षेत्र शामिल है। सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र खैरा प्रखंड क्षेत्र में हरखार स्थित भगवान महावीर की जन्मस्थली तथा लछुआड़ के लिए काफी प्रसिद्ध है। इसके साथ ही यहां कई ऐसे स्थान है, जिन्हें पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिसकी मांग समय समय पर इस क्षेत्र के लोग करते रहे हैं।

सिकंदरा विधानसभा सीट जमुई जिले की एक अहम सीट मानी जाती है, जिसका राजनीतिक इतिहास बेहद दिलचस्प और उतार चढ़ाव भरा रहा है। इस सीट पर एक दौर में कांग्रेस का मजबूत दबदबा था, लेकिन वक्त के साथ यहां राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के समीकरण बदलते चले गए। कभी निर्दलीयों की जीत ने सबको चौंकाया, तो कभी क्षेत्रीय दलों ने बड़ा उलटफेर करके दिखाया। सबसे दिलचस्प बात है कि लालू प्रसाद की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का खाता इस सीट पर आज तक नहीं खुला और शायद इसी छटपटाहट में तेजस्वी यादव गठबंधन धर्म भूल गए।

इस बार के चुनाव में सिकंदरा विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) जहां मजबूती के साथ चुनाव लड़ रहा है, वहीं इंडिया ब्लॉक पूरी तरह यहां बिखर गया है। कभी काग्रेस के गढ़ रहे इस इलाके में राजद ने गठबंधन को लठबंधन बनाते हुए यहां दोस्ताना मुकाबले का ऐलान कर दिया है और कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

उल्लेखनीय है कि इस विधानसभा सीट पर करीब सवा तीन लाख मतदाता हैं। रामेश्वर पासवान यहां से सबसे ज्यादा सात बार निर्वाचित तो हुए हैं लेकिन उसके लिए उन्हें कई दलों के पतवार की जरूरत पड़ी है।

सिकंदरा विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1962 में हुआ, जिसमें कांग्रेस के मुश्ताक अहमद शाह विजयी हुए। उसके बाद 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के एस. विवेकानंद ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली थी, लेकिन 1969 में रामेश्वर पासवान ने कांग्रेस की यहां वापसी कराई। इसके बाद कांग्रेस ने 1985 तक इस सीट पर अपना दबदबा बरकरार रखा। वर्ष 1990 , 95 और 2000 में प्रयाग चौधरी इस सीट से विधायक चुने गए। प्रयाग चौधरी राबड़ी मंत्रिमंडल के सदस्य भी रहे। वर्ष 2005 के फरवरी और नवंबर के चुनाव में रामेश्वर पासवान एक बार फिर विधायक चुने गए और नीतीश सरकार में मंत्री बने।इसके बाद वर्ष 2010 के चुनाव में फिर रामेश्वर पासवान विधायक बने।वर्ष 2015 के चुनाव में कांग्रेस के सुधीर कुमार सिकंदरा से विजयी रहे।

2020 के पिछले विधानसभा चुनाव में सिकंदरा सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला। कांग्रेस के सुधीर कुमार और हिन्दुस्तानी अवाम पार्टी (हम-से) के प्रफुल्ल कुमार मांझी के बीच कांटे की टक्कर हुई। हालांकि प्रफुल्ल कुमार मांझी ने 47,061 वोट प्राप्त कर कांग्रेस के सुधीर कुमार को 5,505 वोट से पराजित कर काग्रेस के इस गढ़ को तोड़ दिया। इस बार सिकंदरा सीट पर राजद और काग्रेस आमने सामने है। इससे यह संभव है कि मुस्लिम वोट बिखरने का फायदा एनडीए को होगा। पिछले दो चुनावों में भी दोनों महागठबंधन से इस सीट पर काग्रेस प्रत्याशी लड़ते आए हैं, लेकिन इस चुनाव में राजद और काग्रेस दोस्ताना मुकाबला करेंगे।

राजद से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी और कांग्रेस से विनोद चौधरी फ्रेंडली फाइट करेंगे। जिसका सीधा फायदा कहीं न कहीं एनडीए के प्रफुल्ल कुमार मांझी को मिलेगा जिनपर एक बार फिर जीतन राम मांझी की हम पार्टी ने दांव खेला है। तस्वीर साफ है मुकाबले को रोचक बनाने में जनसुराज के सुभाष पासवान भी लगे हैं। इस क्षेत्र में 11 नवंबर को मतदान होगा तथा मतगणना 14 नवंबर को होगी। अब देखना होगा कि सिकंदरा का सिकंदर कौन होगा।

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