पटना , नवंबर 01 -- बिहार विधानसभा चुनाव में राज्य के कई पूर्व मुख्यमंत्रियों के रिश्तेदार भी दांव आज़माने के लिये चुनावी दंगल में उतर चुके हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री पूर्व लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव और छोटे पुत्र पूर्व महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव चुनावी रणभूमि में अपना-अपना 'तेज' दिखाने के लिये बेताब नजर आ रहे हैं।

समस्तीपुर जिले की हसनपुर सीट से विधायक तेज प्रताप यादव वैशाली जिले की महुआ सीट से दूसरी बार चुनावी समर में उतरे हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने महुआ सीट से ही अपने राजनीतिक करियर की शानदार शुरूआत की थी और पहली बार विधायक बने। इसके बाद तेज प्रताप ने वर्ष 2020 के चुनाव में अपना रण : क्षेत्र बदल कर हसनपुर कर लिया। हसनपुर में भी तेज प्रताप अपना 'तेज' दिखाने में सफल रहे और दूसरी बार विधायक बने। इस बार तेज प्रताप फिर से महुआ से अपना भाग्य आजमा रहे हैं। हालांकि इस बार की स्थिति कुछ बदली है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से निष्काषित किये जाने के बाद उन्होंने जन शक्ति जनता दल बनायी है जिसके टिकट पर वह चुनावी दंगल में ठोक रहे हैं। तेज प्रताप सियासी पिच पर अपना 'प्रताप' दिखाकर हैट्रिक लगाने की कोशिश कर रहे है।

बिहार में वैशाली जिले की हाईप्रोफाइल राघोपुर विधानसभा सीट से लालू-राबड़ी के छोटे पुत्र तेजस्वी यादव तीसरी बार चुनावी दंगल में उतरे हैं। वर्ष 2015 और वर्ष 2020 में लगातार दो बार राघोपुर से जीत का परचम लहरा चुके तेजस्वी यादव तीसरी बार जीत के साथ अपनी चुनावी हैट्रिक पूरी करने की कोशिश में हैं।वर्ष 2015 में तेजस्वी यादव ने क्रिकेट की दुनिया छोड़ इस सीट से जीत दर्ज करते हुए राजनीति में शानदार आगाज किया था ।वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने दूसरी बार राघोपुर से अपनी किस्मत आजमायी और दूसरी बार भी शानदार जीत दर्ज की।राघोपुर सीट राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार की परंपरागत सीट मानी जाती है। यहां लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव जीतते आए हैं। लालू प्रसाद यादव ने इस सीट से वर्ष 1995 और वर्ष 2000 के विधानसभा में जीत हासिल की थी। इसके बाद उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने भी फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 में हुए दोनों चुनावों में जीत हासिल की।

सारण जिले की परसा विधानसभा सीट पर राजद के टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. दारोगा प्रसाद राय की पोती करिश्मा राय उम्मीदवार हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में स्व. दारोगा प्रसाद राय के परिवार का दबदबा रहा है। स्व. राय इस सीट से वर्ष 1952, 1957, 1962, 1967, 1969, 1972, 1980 में निर्वाचित हुये थे। उनके निधन के बाद हुये उप चुनाव में वर्ष 1981 में उनकी पत्नी पार्वती देवी निर्वाचित हुयी। इसके बाद दारोगा प्रसाद राय के पुत्र चंद्रिका राय ने 1985, 1990, 1995, 2000, फरवरी 2005 और वर्ष 2015 में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। डॉ. करिश्मा राय, तेजप्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय की चचेरी बहन हैं। देखना दिलचस्प होगा कि अपने परिवार की परंपरागत सीट परसा पर करिश्मा राय अपना 'करिश्मा' दिखाने में कितना सफल होती है।

मधुबनी जिले की झंझारपुर विधानसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र और उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा पांचवी बार जीत की तलाश में हैं। जगन्नाथ मिश्रा ने इस सीट पर पांच बार प्रतिनधित्व किया था।

पश्विमी चंपारण जिले के नरकटियागंज सीट से कांग्रेस की टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय के पुत्र शाश्वत केदार चुनावी समर में उतर रहे हैं। शाश्वत केदार के पिता मनोज पांडेय बेतिया के सांसद रह चुके हैं। शाश्वत केदार की दादी कमला पांडेय दो बार नौतन की विधायक रही है।

समस्तीपुर जिले के मोरबा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक कर्पूरी ठाकुर की पौत्री जागृति ठाकुर जनसुराज के टिकट पर चुनावी संग्राम में उतरी हैं।डॉ. जागृति ,केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर की भतीजी हैं।

बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर से राजद के टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह के पुत्र सुशील कुमार चुनावी दंगल में उतरे हैं।बिहार के पांच दिन के मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह ने परबत्ता विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। वह खगड़िया के सांसद भी रहे हैं।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और हिंदुस्तान आवामी मोर्चा (हम) के संस्थापक जीतन राम मांझी की बहू दीपा कुमार इमामगंज (सुरक्षित) सीट से और बाराचट्टी (सुरक्षित) से उनकी समधन ज्योति देवी चुनाव लड़ रही है। वैशाली जिले की राजापाकड़ (सुरक्षित) सीट से कांग्रेस के टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास की रिश्तेदार और विधायक प्रतिमा कुमारी दास चुनावी दंगल में दूसरी बार जीत की तलाश में हैं।

देखना दिलचस्प है कि चुनावी रण में उतरे पूर्व मुख्यमंत्रियों के कितने रिश्तेदार जीत का परचम लहराने में सफल होते हैं।

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