पटना, दिसंबर 15 -- प्रसिद्ध गणितज्ञ और हाल ही में संपन्न हुए बिहार चुनाव में कुम्हरार विधानसभा सीट पर जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी केसी सिन्हा ने कहा कि बिहार की राजनीति में जनसुराज का इंतजार भले बढ़ गया है, लेकिन उम्मीदें खत्म नही हुई हैं।

श्री सिन्हा ने यूनीवार्ता से बात करते हुए आज कहा कि जनसुराज चुनावी मैदान में होते हुए भी उस राजनीति का हिस्सा नहीं है, जो प्रदेश में लम्बे समय से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि उनके जनसुराज से जुड़ने की वजह पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर की अलग और साफ सुथरी राजनीति की सोच थी। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रजातंत्र में चुनाव जीतने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं, लेकिन जनसुराज के उम्मीदवारों को गलत तरीकों से जीतने की जगह हारना मंजूर था। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए आवश्यक हथकंडों का प्रयोग नही करने के कारण उनकी और पार्टी की हार हुई।

प्रसिद्ध गणितज्ञ ने कहा कि वह अकेले नही हैं, जो सामाजिक लोकप्रियता के बावजूद चुनाव हारे हैं। उन्होने कहा कि एक समय प्रजातंत्र के रक्षक की भूमिका अदा करने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन भी चुनाव हार गए थे।

श्री सिन्हा ने कहा कि चुनाव हारने से उनका मनोबल कम नही हुआ है और भविष्य में भी जनसुराज में बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि जनसुराज बिहारी समाज और राजनीतिक को बदलने की मुहिम है और पिछले चुनाव के समय इस मुहिम में कुछ कमी रह गयी होगी, इसलिए चुनाव में हार मिली। उन्होंने कहा कि बिहार को बदलने की मुहिम में वह भविष्य में जनसुराज के साथ होंगे। उन्होंने कहा कि जनसुराज तीन साल पुराना आंदोलन और एक साल पुरानी राजनीतिक पार्टी है और अगले पांच साल में परिपक्वता हासिल करते हुए सत्ता को गम्भीर चुनौती देने में सक्षम होगी।

प्रसिद्ध गणितज्ञ ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह पिछले तीन दशकों से युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहे हैं, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की खामियां दूर करना उनके अकेले वश में नही है। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में उतरने का उनका फैसला भविष्य में बिहार की शिक्षा व्यवस्था में आमूल चूल सुधार के सपनों का परिणाम था। उन्होंने कहा कि जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर एक दृढ़ और मजबूत इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति हैं और इस बार चुनाव में हार उन्हें थोड़ा दर्द भले दे दे, लेकिन बिहार बदलने के मिशन से उन्हें विचलित नही कर पायेगी। उन्होंने कहा कि जनसुराज के लिए इंतेजार भले बढ़ गया है, उम्मीदें खत्म नही हुई हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित