पटना , नवंबर 16 -- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्या ने रविवार को कहा कि बिहार का विधानसभा चुनाव का परिणाम न तो अपेक्षित है और न ही समझ में आने वाला है, यह पूरी तरह अप्रत्याशित है।
श्री भट्टाचार्य ने आज यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बिहार का चुनाव परिणाम न तो अपेक्षित है और न ही सहज समझ में आने वाला है, यह पूरी तरह अप्रत्याशित है। उन्होंने वर्ष 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वह समय नीतीश कुमार के उभार का समय था, लेकिन आज एक लड़खड़ाती हुई सरकार को इतना बड़ा बहुमत मिलना समझ से परे और शोध का विषय है।
भाकपा माले महासचिव ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गयी है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए चुनाव से ठीक पहले पूरी मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार किया गया,लगभग 70 लाख नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि कई लोग जब वोट डालने पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि उनका नाम सूची में नहीं है। उन्होंने कहा कि 22 लाख नाम जोड़े गए, और एसआईआर की फाइनल लिस्ट के बाद केवल 10 दिनों में साढ़े तीन लाख नए नाम भी जोड़ दिए गए. यह कोई मामूली बात नहीं है और इसका चुनाव पर गहरा प्रभाव पड़ा।
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव की घोषणा तब तक नहीं हुई, जब तक सरकार ने अपनी सभी योजनाओं की घोषणाएँ नहीं कर दीं। उन्होंने कहा कि दस हजार रुपये की योजना का पैसा पूरे चुनाव काल में खुलकर बंटता रहा। उन्होंने कहा कि 30 दिनों में 30 हजार करोड़ रुपये बांटने की छूट,यह बेहद चिंताजनक है।भारत के चुनाव इतिहास में इस तरह की मिसाल नहीं मिलती। यदि भविष्य में भी सरकारों को चुनाव से ठीक पहले इस तरह पैसे बाँटने की छूट मिलती रही, तो चुनाव की निष्पक्षता और लोकतंत्र दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।
भाकपा माले महासचिव ने कहा कि उनकी पार्टी को 14 लाख से अधिक वोट मिले, यानी वोटों में कोई कमी नहीं आई, फिर भी सीटों में यह दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का वोट प्रतिशत तीन है, जबकि सीटें मात्र एक प्रतिशत के आसपास रही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का वोट प्रतिशत सबसे अधिक है, लेकिन उसके केवल 25 सीटें मिली। उन्होंने कहा कि दबावों के बावजूद उनकी पार्टी पर पर भरोसा जताने वाले 14 लाख वोटरों के प्रति वह गहरा आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने महाठबंधन के साथ खड़े सभी लोगों और कार्यकर्ताओं को भी धन्यवाद दिया।उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा, आवास, सुरक्षित काम, जीने लायक वेतन, दलित उत्पीड़न, महिलाओं पर हिंसा और अल्पसंख्यकों पर हमले जैसे असली मुद्दों पर संघर्ष की राह और तेज़ होगी।
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि महागठबंधन को झटका मिला है और लोग दुखी हैं, लेकिन एसआईआर को लेकर चिंता पूरे देश में महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों से लगातार फोन आ रहे हैं , लोग कह रहे हैं कि एसआईआर के खिलाफ लड़ाई पूरे देश का मुद्दा बनेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष विहीन लोकतंत्र बनाने की जो कोशिशें चल रही हैं, वे चिंता बढ़ाती हैं, लेकिन इसी चिंता के बीच से रास्ता निकलेगा। उन्होंने बताया कि 28 से 30 नवंबर तक पटना में पार्टी की केंद्रीय कमिटी की बैठक और एक दिसंबर को राज्य कमिटी की बैठक आयोजित होगी।
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