, Feb. 28 -- प्रो. सुनैना सिंह ने बिहार की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए शिक्षा को रचनात्मक और शोध-आधारित बनाने की आवश्यकता बताई।
प्रो. बलराम सिंह ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय प्रतिभा की क्षमता को रेखांकित करते हुए मौलिक शोध और नवाचार को प्राथमिकता देने की बात कही। प्रो. दीपक श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि शिक्षा को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने का माध्यम है।
कॉन्क्लेव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन की समीक्षा, शिक्षा को रोजगार एवं कौशल विकास से जोड़ने, भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक पाठ्यक्रमों में समाहित करने, उद्योग-अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में विश्वविद्यालयों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई।
दिनभर चले विचार-विमर्श से यह स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रमुख स्तंभ हैं। एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा संवाद के अग्रणी मंच के रूप में स्थापित करते हुए नीति, शोध और उद्योग जगत के बीच सार्थक सहयोग की नई दिशा प्रदान की।
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