कोण्डागांव , दिसंबर 05 -- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान ने ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। इसी पहल का प्रभाव ग्राम छोटेराजपुर की प्रमिला मरकाम की सफलता में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। परिवार की पारंपरिक रॉट आयरन कला को आधुनिक बाजार से जोड़कर प्रमिला आज सालाना 5 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर उभरी हैं।

जिला पीआरओ से शुक्रवार को मिली जानकारी के मुताबिक बड़ेराजपुर विकासखंड मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित छोटेराजपुर की प्रमिला पहले मजदूरी और कृषि आधारित आय पर निर्भर थीं। पवित्रा स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। समूह के माध्यम से मिली प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता ने उन्हें रॉट आयरन कला को विस्तार देने का अवसर दिया। प्रमिला ने 80 से अधिक प्रकार की कलाकृतियां बनाना शुरू किया, जिनमें बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक झलक और परंपराएं साफ झलकती हैं।

बिहान की मदद से प्रमिला ने अपनी कला को राष्ट्रीय स्तर के बाजारों तक पहुँचाया। गुजरात, गोवा, दिल्ली, असम और नोएडा सहित कई शहरों में आयोजित सरस मेलों में भाग लेकर अब तक वे लगभग 12 लाख रुपये की आय अर्जित कर चुकी हैं। उनकी तैयार की गई 1500 से अधिक कलाकृतियों का मूल्य 30 लाख रुपये से अधिक है, जिनमें से 857 उत्पादों का विक्रय कर 13 लाख रुपये की कमाई हुई है। हाल ही में 06 सितंबर 2025 को दिल्ली में हुए सरस मेले में प्रमिला ने 496 उत्पाद बेचकर 3 लाख 87 हजार 500 रुपये की आय हासिल की।

प्रमिला ने बताया कि बिहान ने उनकी कला को नई दिशा दी और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस सहयोग ने न केवल उनकी आजीविका को मजबूत किया बल्कि बस्तर की पारंपरिक रॉट आयरन कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी मदद की।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित