नयी दिल्ली , फरवरी 04 -- लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में पूर्व लोक सभा अध्यक्ष एम. अनन्तशयनम आयंगर की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
श्री बिरला ने अपने संदेश में कहा ''राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन और संविधान निर्माण की यात्रा में श्री आयंगर का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। युवावस्था से ही वे स्वतंत्रता संग्राम के विविध चरणों में सक्रिय रहे और महात्मा गांधी के आह्वान पर 'असहयोग आंदोलन' के दौरान 1921-22 में एक वर्ष के लिए अपनी वकालत भी त्याग दी। 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भी उन्होंने साहस, दृढ़ता और जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्व का परिचय दिया।''उन्होंने कहा कि संविधान सभा के सदस्य के रूप में उन्होंने संचालन समिति में अपनी विद्वत्ता, विमर्श-कौशल और दूरदर्शिता से भारतीय संविधान की रूपरेखा को सुदृढ़ बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति उनकी निष्ठा और जनसेवा के प्रति समर्पित उनका संपूर्ण जीवन हम सभी के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
इस दौरान राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश, संसद सदस्यों, पूर्व सांसदों तथा लोक सभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने भी श्री आयंगर को पुष्पांजलि अर्पित की।
लोकसभा सचिवालय की ओर कहा गया है कि श्री आयंगर केंद्रीय विधान सभा, संविधान सभा, अंतरिम संसद तथा पहली से तीसरी लोक सभाओं के सदस्य रहे। वर्ष 1952 में पहली लोक सभा के गठन के समय, उन्हें सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष चुना गया था। इससे पूर्व वह संविधान सभा (विधायी) के उपाध्यक्ष तथा अस्थायी संसद के उपाध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दे चुके थे। तत्कालीन लोक सभा अध्यक्ष जी. वी. मावलंकर के आकस्मिक निधन के बाद, 8 मार्च 1956 को श्री आयंगर को सर्वसम्मति से लोक सभा का अध्यक्ष चुना गया। वर्ष 1957 में वह पुनः सर्वसम्मति से दूसरी लोक सभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। तीसरी लोक सभा के लिए निर्वाचित होने के बाद, उन्होंने बिहार के राज्यपाल का पद ग्रहण करने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। श्री आयंगर का निधन 19 मार्च 1978 को हुआ।
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