पटियाला , नवंबर 13 -- बिजली निजीकरण और बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 के खिलाफ किसान संगठन और अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनें बिजली कर्मचारी संगठनों के साथ आने पर सहमत हो गयी हैं। इस संयुक्त संघर्ष की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए 14 दिसंबर को दिल्ली में एक संयुक्त बैठक बुलायी गयी है।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने गुरुवार को कहा कि किसान संगठन और अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनें इस बात पर सहमत हैं कि विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 पूरे बिजली क्षेत्र के पूर्ण निजीकरण के लिए लाया गया है और इसके खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बेहद ज़रूरी है। इस संबंध में, बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) ने 14 दिसंबर को दिल्ली में एक बैठक बुलायी है।

संयुक्त बैठक में किसान संगठनों, किसान मजदूर मोर्चा और अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के सभी प्रमुख राष्ट्रीय पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के खिलाफ लगभग एक साल से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। एआईपीईएफ के प्रवक्ता वी के गुप्ता ने बताया कि इस बीच, भारत सरकार ने देश के संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के लिए विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 का मसौदा जारी कर दिया है और नवंबर के अंत तक इस पर टिप्पणियां मांगी हैं। इसके अतिरिक्त, मंत्रिसमूह की बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार, राज्यों पर दबाव बनाया जा रहा है कि केंद्र सरकार वित्तीय सहायता तभी प्रदान करेगी, जब राज्य निजीकरण के तीन विकल्पों में से एक को स्वीकार करेंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित