अमृतसर , दिसंबर 03 -- श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज ने भारतीय बाल कल्याण परिषद से संबद्ध बाल कल्याण परिषद, पंजाब द्वारा श्री गुरु गोबिंद सिंह के साहिबज़ादों के शहीदी दिवस को समर्पित आपत्तिजनक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताओं के आयोजन पर कड़ा संज्ञान लिया है।

जत्थेदार ने बुधवार को कहा कि इन आयोजनों को तत्काल रद्द किया जाये। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि केंद्र और पंजाब सरकारें सिख सिद्धांतों, भावनाओं और परंपराओं के प्रति न तो गंभीरता दिखाती हैं और न ही समझती हैं, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी विभागों के अधिकारी मनमाने और सिख विरोधी निर्देश जारी कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पंजाब बाल कल्याण परिषद द्वारा सभी उपायुक्तों और जिला बाल कल्याण परिषद के अध्यक्षों को जारी 12 नवंबर 2025 का एक आदेश हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस आदेश में पंजाब भर के जिलों को साहिबज़ादों, माता गुजर कौर जी और बाबा बंदा सिंह बहादुर से संबंधित विषयों पर फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताएं आयोजित करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था।

जत्थेदार ने कहा कि सरकारी प्रतिनिधियों को यह जागरूकता और समझ होनी चाहिए कि सिख गुरुओं, उनके परिवार के सदस्यों, चार साहिबज़ादों और सिख शहीदों का किसी भी प्रकार का चित्रण या अनुकरण सख्त वर्जित है, और इस सिद्धांत का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार बच्चों को फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताओं में साहिबज़ादों, माता गुजर कौर या बाबा बंदा सिंह बहादुर की पोशाक पहनने के लिए कहकर कैसे सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहती है, यह कृत्य सिख भावनाओं को गहरा ठेस पहुंचाता है और सिख सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि सिख परंपराएं गुरुओं, उनके परिवारों या साहिबज़ादों की नकल करने की अनुमति नहीं देती हैं। गुरुओं और साहिबज़ादों से जुड़ा इतिहास शाश्वत सत्य है और इसके प्रचार के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताओं की आवश्यकता नहीं है।

जत्थेदार ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को निर्देश दिया है कि वे बाल कल्याण परिषद, पंजाब के साथ पत्राचार करें और इन आपत्तिजनक कार्यक्रमों को तुरंत रद्द करना सुनिश्चित करें। जत्थेदार ने कहा कि छोटे साहिबज़ादों की शहादत को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का केंद्र सरकार का फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन इस दिन को आधिकारिक तौर पर 'साहिबज़ादे शहादत दिवस' घोषित किया जाना चाहिए, न कि 'वीर बल दिवस।' सरकार को सिख समुदाय पर अपनी शब्दावली थोपने के बजाय सिख भावनाओं, सिद्धांतों और शब्दावली का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'वीर बल दिवस' नाम श्री अकाल तख्त साहिब को मंजूर नहीं है।

जत्थेदार ने पंजाब सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य के किसी भी ज़िले या स्कूल में बाल कल्याण परिषद के आदेशों के अनुसार साहिबज़ादों, माता गुजर कौर जी या बाबा बंदा सिंह बहादुर से संबंधित विषयों पर फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने पंजाब सरकार से सिख भावनाओं का हवाला देते हुए परिषद के निर्देशों पर आधिकारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराने को कहा। उन्होंने सिख समुदाय से सतर्क रहने और अगर कहीं भी साहिबज़ादों की नकल से जुड़ा कोई भी आयोजन होता है, तो उसका शांतिपूर्ण और क़ानूनी दायरे में विरोध करने और उसे रोकने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सिख अपनी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी आचरण को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी पंजाब सरकार द्वारा 12 दिसंबर, 2025 को लुधियाना में आयोजित किये जा रहे राज्य स्तरीय 'वीर बल दिवस' पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सिख सिद्धांतों और परंपराओं के खिलाफ करार दिया है। उन्होंने कहा कि सिख सिद्धांतों, परंपराओं, रीति-रिवाजों और मूल्यों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई सिख मानसिकता को ठेस पहुंचाती है और पंजाब सरकार द्वारा वीर बल दिवस के संबंध में दिये गये निर्देश माता गुजरी जी और छोटे साहिबजादों की अद्वितीय शहादत की पवित्रता को ठेस पहुंचाने और कम करने वाले हैं। एडवोकेट धामी ने कहा कि पंजाब सरकार ने गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी पर्व के दौरान आयोजित कई धार्मिक आयोजनों में भी शिष्टाचार और परंपराओं का उल्लंघन किया, जिससे सिख भावनाओं को ठेस पहुंची है। सरकार ने गुरमत आयोजनों को केवल सरकारी कार्यक्रम बनाकर पंजाब के खजाने का लाभ बाहरी कंपनियों को दिया। उन्होंने कहा कि अब 'वीर बल दिवस' कार्यक्रम के तहत स्कूलों में माता गुजरी जी, छोटे साहिबजादों और शहीद सिंहों की पोशाकें पहनकर प्रतियोगिताएं आयोजित करने की प्रथा सिख शिष्टाचार के विरुद्ध है।

एडवोकेट धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशानुसार वीर बल दिवस संबंधी नाम बदलने के लिए केंद्र सरकार को पहले ही लिखा जा चुका है, लेकिन सरकार ने आज तक इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि इस सिख विरोधी घटना की जिम्मेदारी सीधे तौर पर केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों की है। सिख जगत ऐसी कार्रवाई को कभी स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने संगत से अपील की कि वे अपने बच्चों को ऐसे सिख विरोधी आयोजनों में शामिल होने से रोकें, ताकि सिख परंपराओं और मूल्यों की मौलिकता बनी रहे।

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