बालोद , फरवरी 27 -- छत्तीसगढ़ में बालोद के नए बस स्टैंड परिसर में जिलेभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी त्रि-सूत्रीय मांगों को लेकर दो दिवसीय हड़ताल पर बैठीं हैं और शुक्रवार को सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने शहर में रैली निकाली तथा प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो मार्च माह में प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन करते हुए विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
हड़ताल के कारण जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहे, जिससे महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं का संचालन प्रभावित हुआ। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे वर्षों से पोषण अभियान, टीकाकरण सहयोग, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की देखभाल, सर्वे कार्य सहित अनेक जिम्मेदारियां निभा रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। नियमित कर्मचारियों की तरह वेतनमान और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित करना शामिल है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार शिक्षा कर्मियों और पंचायत कर्मियों का नियमितीकरण किया गया, उसी प्रकार उन्हें भी नियमित किया जाए। जब तक शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता, तब तक न्यूनतम वेतन लागू करने, मध्यप्रदेश की तर्ज पर सभी सुविधाएं प्रदान करने तथा प्रतिवर्ष एक हजार रुपये मानदेय वृद्धि का प्रावधान करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा के तहत मासिक पेंशन, बीमा, सेवानिवृत्ति लाभ, मृत्यु पर एकमुश्त अनुग्रह राशि एवं ग्रेच्युटी देने की भी मांग उठाई गई।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान मानदेय महंगाई के अनुरूप नहीं है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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