भुवनेश्वर , नवंबर 13 -- ओडिशा के राज्यपाल डॉ हरि बाबू कंभमपति ने कहा है कि ऐतिहासिक बालीजात्रा उत्सव एकता, सद्भावना और साझा समृद्धि का शाश्वत संदेश देता है।
राज्यपाल ने कटक में बुधवार रात को बालीजात्रा के समापन समारोह में अपने उद्बोधन में इस उत्सव को मानवता की स्थायी भावना का जीवंत प्रतीक बताया, जहां व्यापार और यात्रा सभ्यताओं को जोड़ने वाले सेतु का काम करते हैं। उन्होंने बालीजात्रा को समृद्धि और नैतिकता का उत्सव बताया और कहा, " सद्भावना से प्रेरित होकर व्यापार और यात्रा सभ्यताओं को एकजुट कर सकते हैं और जहां राजनीति विफल हो सकती है, वहां सद्भाव ला सकते हैं।"डॉ कंभमपति ने बालीजात्रा को ओडिशा की शाश्वत भावना का एक शानदार प्रमाण बताया, जो कलिंग के प्राचीन नाविकों (सदाबा पुआ) के साहस और आधुनिक ओडिशा की रचनात्मकता को विरासत और गौरव के एक अटूट सूत्र में पिरोती है। राज्यपाल ने कलिंग के समुद्री गौरव को याद करते हुए कहा कि एक समय बहादुर नाविक महानदी के तट से श्रीलंका, जावा, सुमात्रा, बाली और कंबोडिया जैसे दूर-दराज के देशों के लिए रवाना हुए थे और अपने साथ न केवल सामान, बल्कि कला, भाषा और आस्था का प्रकाश भी ले गये थे।
डॉ कंभमपति ने कहा कि उनकी यात्राओं ने साबित कर दिया कि समुद्र दिलों और सभ्यताओं को जोड़ने वाले सेतु का काम कर सकता है। उन्होंने बालीजात्रा को 'ओडिया आत्मा का दर्पण' बताते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि असली धन लोगों के लचीलेपन और कलात्मकता में निहित है।
राज्यपाल ने युवाओं से प्रौद्योगिकी, नवाचार और उद्यम के नये क्षेत्रों में कदम रखकर सदाबा पुआ की भावना को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस भव्य उत्सव के सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार, कटक जिला प्रशासन को सराहा। इसके साथ ही उन्होंने 200 करोड़ रुपये की महानदी रिवरफ्रंट विकास परियोजना की सराहना की।
राज्यपाल ने बालीजात्रा के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने की पहल की सराहना की तथा वैश्विक मंच पर भारत की समुद्री विरासत को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
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