बारां , दिसम्बर 04 -- राजस्थान में बारां जिले के शाहबाद, किशनगंज क्षेत्र के रामगढ़ क्रेटर क्षेत्र में कूनो से आए चीते की मौजूदगी से स्थानीय ग्रामीणों में भय व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले एक सप्ताह से वनकर्मी उसे उसके मूल स्थान की ओर खदेड़ने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसमें सफलता नहीं मिली है। आठवें दिन पहली बार बिसलाई गांव के पास चीता केपी-2 दिखाई दिया। इससे इसके इस क्षेत्र में मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है।
मध्यप्रदेश के शिवपुरी, श्योपुर जिले से सटे राजस्थान के बारां जिले की सीमा में शाहाबाद क्षेत्र का बियाबान जंगल कूनो नेशनल पार्क से सटा हुआ है। यहां अफ्रीका एवं नामीबिया से लाये गये चीतों का पुनर्वास किया गया है। इन्हें खुले में छोड़ते ही ये जिले के शाहबाद, किशनगंज के जंगल में पहुंच जाते हैं। माना जाता है कि बारां जिले के जंगल तेंदुए और चीतों के रहवास के लिए अनुकूल इलाका है। वैसे भी यहां वन्य जीवों की आवाजाही बनी रहती है। इससे इन्हें पर्याप्त शिकार मिल जाता है।
रामगढ़ माता मंदिर के पुजारी कालूलाल ने बताया कि अफ्रीकन मेहमान ने चांदवाली माल की तलाई की ओर कच्चे रास्ते के आसपास अपना डेरा जमाया हुआ है, इससे यहां डर बना हुआ है। विभाग को यहां सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए। इस चीते ने क्षेत्र में नीलगाय, बछड़ा, बकरी सहित अन्य जीवों का शिकार भी किया है, हालांकि अब तक इसने किसी इंसान पर हमला नहीं किया है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र में भरपूर भयावह जंगल, पर्याप्त पानी के साथ ही अनुकूल वातावरण मिलने से चीते की वापसी होने की संभावना कम नजर आ रही है।
इस बीच वन विभाग के अलावा कूनो नेशनल पार्क से आया दल भी लगातार चीते पर निगरानी कर रहा है। बताया गया कि पहली बार बिसलाई गांव के पास चीता केपी-2 देखा गया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित