दंतेवाड़ा , अप्रैल 03 -- छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा में कांग्रेस ने शुक्रवार को बारसूर-गीदम मार्ग की जर्जर हालत और लगातार हो रही दुर्घटनाओं के विरोध में चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

आज सुबह 7 बजे से 11 बजे तक चले इस आंदोलन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर आवागमन बाधित किया और प्रशासन, राज्यपाल व राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा ने आरोप लगाया कि बारसूर-गीदम सड़क पर गड्ढों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं, जिनमें अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा कि बारसूर एक विश्व प्रसिद्ध मंदिरों की पर्यटन नगरी है, जहां छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी पर्यटक आते हैं, बावजूद इसके सड़क की हालत बेहद खराब है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास सड़क निर्माण के लिए पर्याप्त फंड होने के बावजूद काम नहीं कराया जा रहा है और डीएमएफ जैसी निधियों का भी सही उपयोग नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से सड़क निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है और कछुआ गति से काम होने के कारण करीब 20 किलोमीटर लंबी इस सड़क को पूरा होने में वर्षों लग सकते हैं। उन्होंने यह कहा कि हाल ही में इसी मार्ग से होकर गृहमंत्री विजय शर्मा का दौरा हुआ, लेकिन उन्हें सड़क की जर्जर स्थिति नजर नहीं आई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो कांग्रेस जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन करेगी।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जिले में बिना स्वीकृत अनुमान के कार्य और भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व में पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और कलेक्टर को सड़क की मरम्मत व पुनर्निर्माण के लिए निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि आंदोलन के दौरान अधिकारियों ने सड़क की मरम्मत का आश्वासन दिया है।

बारसूर, उपेट, पुरनतराई, नागफनी, कोरलापाल, रोंजे, घोटपाल और हिरानार से लेकर गीदम तक सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। सोशल मीडिया पर भी इस सड़क को लेकर लगातार नाराजगी व्यक्त की जा रही है। पिछले एक वर्ष से लेकर हाल के महीनों तक करीब 8 लोगों की मौत सड़क के गड्ढों के कारण हुई दुर्घटनाओं में हो चुकी है, जिससे आमजन में आक्रोश बढ़ा है। इस मार्ग से शिक्षक, व्यापारी और अधिकारी प्रतिदिन आवागमन करते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार को अब तक पांच बार नोटिस जारी किया जा चुका है और कार्य में लापरवाही के चलते रिटेंडर की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि केंद्र से भी इस सड़क के निर्माण के लिए स्वीकृति मिल चुकी है।

इस पूरे मामले पर लोक निर्माण विभाग के मंत्री अरुण साव ने राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए जवाब दिया। रायपुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष में 993 कार्यों के लिए 9129 करोड़ 18 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई है, जो राज्य निर्माण के बाद किसी एक वर्ष में अब तक की सबसे बड़ी राशि है। इन कार्यों में सड़क, पुल-पुलिया और भवन निर्माण शामिल हैं।

श्री साव ने कहा कि सरकार का फोकस सड़कों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है और दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की निगरानी बढ़ाई गई है और ठेकेदारों को भी जवाबदेह बनाया जा रहा है।

उन्होंने नक्सलवाद के मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई है और इस मुद्दे पर राजनीति करना उचित नहीं है। उन्होंने पूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले ठोस प्रयास नहीं किए गए, जबकि वर्तमान सरकार विकास और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर काम कर रही है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित