हैदराबाद , फरवरी 17 -- तेलंगाना सरकार की ओर से आयोजित वैश्विक जीवन विज्ञान एवं जैव-प्रौद्योगिकी सम्मेलन बायोएशिया 2026 का 23वां संस्करण मंगलवार को यहां हिटेक्श प्रदर्शनी केंद्र में शुरू हुआ।
दो दिवसीय इस सम्मेलन की थीम "टेकबायो अनलीश्ड: एआई, ऑटोमेशन एंड द बायोलॉजी रिवोल्यूशन" रखी गई है। इसमें दुनिया भर से नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के नेता, नवप्रवर्तक और निवेशक भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि पिछले दो दशकों में हैदराबाद ने उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। चारमीनार, बिरयानी, फार्मास्यूटिकल्स और सॉफ्टवेयर के लिए पहचाने जाने वाला शहर अब वैक्सीन, बायोटेक्नोलॉजी और उन्नत जीवन विज्ञान का वैश्विक केंद्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नीतिगत दृष्टि, उच्च कौशलयुक्त मानव संसाधन और मजबूत शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के कारण हैदराबाद आज वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसीएस) के लिए पसंदीदा गंतव्य बन गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते दो वर्षों में राज्य ने जीवन विज्ञान क्षेत्र में 73,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आकर्षित किए हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपनी नयी जीवन विज्ञान नीति का अनावरण किया, जिसका लक्ष्य नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि जीनोम घाटी का उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। साथ ही "दुनिया के लिए एक बायो" क्लाउड-आधारित अनुसंधान एवं नवाचार मंच और त्वरित जैव-निर्माण कार्यक्रमों जैसी पहलें राज्य के बायो-इकोसिस्टम को मजबूत कर रही हैं। यह विकास क्रमिक नहीं बल्कि परिवर्तनकारी है।
श्री रेड्डी ने बताया कि इस वर्ष सम्मेलन में 4,000 से अधिक प्रतिनिधि और 500 से अधिक अग्रणी वैश्विक कंपनियां भाग ले रही हैं।सम्मेलन में फार्मा, बायोटेक, वैक्सीन विज्ञान, स्वास्थ्य सेवा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विनिर्माण और सार्वजनिक नीति से जुड़े शीर्ष नेतृत्व की भागीदारी हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि हैदराबाद में आयोजित बायोएशिया 2026 को जल्द ही दावोस स्थित विश्व आर्थिक मंच जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म के समकक्ष पहचान मिलेगी।
दीर्घकालिक दृष्टि साझा करते हुए उन्होंने " तेलंगाना राइजिंग 2047" का उल्लेख किया, जिसके तहत सरकार 2034-47 तक राज्य को एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने अनुसंधान प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप, एमएसएमई, उद्योग और सरकार के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए वैश्विक कंपनियों को तेलंगाना में निवेश, जीसीसी स्थापित करने, नवाचार केंद्र विकसित करने, नई दवाओं एवं अणुओं के डिजाइन, एआई प्लेटफॉर्म के विकास, क्लिनिकल एनालिटिक्स प्रबंधन और डिजिटल विनिर्माण को बढ़ावा देने का आमंत्रण दिया।
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