रांची , फरवरी 18 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बजट सत्र के दौरान सदन में दिए गए राज्यपाल के अभिभाषण को 'झूठ का पुलिंदा' करार दिया।

श्री मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार तर्कहीन और तथ्यहीन बातें कर रही है तथा भाजपा-एनडीए गठबंधन सत्र के दौरान इन दावों की सच्चाई उजागर करेगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय कुप्रबंधन, घपले-घोटाले और मुख्यमंत्री के संरक्षण में हो रहे भ्रष्टाचार के कारण झारखंड आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर असहयोग का आरोप लगाए जाने को संकीर्ण मानसिकता और निम्नस्तरीय राजनीति बताया।

श्री मरांडी ने आज कहा कि यूपीए शासन के 10 वर्षों में झारखंड को महज 56 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिली थी, जबकि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राज्य को तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी है।

श्री मरांडी ने आरोप लगाया कि केंद्र से प्राप्त फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा है और उपयोगिता प्रमाण पत्र भी समय पर नहीं दिया जा रहा। उन्होंने दावा किया कि राज्य के खजाने से 10 हजार करोड़ रुपये गायब हैं। प्रदेश के वित्त मंत्री जांच चाहते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव जांच नहीं होने दे रहे।

रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार 342 नौकरियां देने का दावा कर रही है, जबकि सरकारी विभागों में डेढ़ लाख से अधिक पद खाली हैं। उन्होंने सरकारी नौकरियों की बिक्री का आरोप लगाते हुए जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को उदाहरण बताया।

श्री मरांडी ने कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा-एनडीए गठबंधन जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएगा और सरकार को जवाब देने के लिए बाध्य करेगा।

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