रांची , मार्च 31 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था की लेकर राज्य सरकार पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
श्री मरांडी ने कहा कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था संसाधनों की भारी कमी से जूझ रही है।
उन्होंने बताया कि झारखंड में वर्ष 2018 के बाद से पुलिस बल में दारोगा की नई भर्तियां नहीं हुई हैं, जबकि आबादी लगातार बढ़ रही है।
बीपीआरडी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में राज्य में प्रति एक लाख आबादी पर 163 पुलिसकर्मी थे, जो घटकर अब 152 रह गए हैं, जबकि आवश्यकता 209 पुलिसकर्मियों की है। यह स्पष्ट करता है कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था संसाधनों की भारी कमी से जूझ रही है।
श्री मरांडी ने कहा कि वर्तमान में स्वीकृत पद की तुलना में लगभग 29.75% पद रिक्त हैं। दूसरी ओर अपराध के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। 2024 में 60,606 आपराधिक घटनाएं दर्ज हुईं, जो 2025 में बढ़कर 62,544 हो गईं। विदेश में बैठा प्रिंस खान और जेल में बंद सुजीत सिन्हा जैसे दुर्दांत अपराधी बेधड़क अपना आपराधिक सिंडिकेट चलाकर रंगदारी/लेवी/हफ्ता वसूल रहे हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि अपराधियों को संरक्षण देने के लिए ही पुलिस बल में नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। डीजीपी, मुख्य सचिव जैसे शीर्ष अधिकारियों के इन अपराधियों से जुड़ते तार शक को और गहराते हैं।
श्री मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन जी, राज्य में लाखों युवा बेरोजगार बैठे हैं। 8 वर्षों से लंबित दारोगा की बहाली शीघ्र शुरू करें और प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करें।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित