रांची , फरवरी 20 -- झारखंड विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन राज्य में होने वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन(एसआईआर ) को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने चुनाव आयोग के निर्णय का समर्थन किया।

श्री मरांडी ने कहा कि एसआईआर के माध्यम से सही मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित होगी और मतदाता सूची का शुद्धिकरण संभव हो सकेगा।

विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए श्री मरांडी ने आज कहा कि देश में प्रत्येक दस वर्ष पर एसआईआर की प्रक्रिया होती रही है। एसआईआर का अर्थ है मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण, जिसके तहत मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं, जो लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो गए हैं उनके नाम हटते हैं और जो अवैध रूप से मतदाता सूची में शामिल हुए हैं, उनकी पहचान कर नाम विलोपित किए जाते हैं।

श्री मरांडी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी शुरू से एसआईआर का विरोध करती रही है। मरांडी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठिए जो अवैध रूप से मतदाता बने हुए हैं, उनके नाम कटने की आशंका से कांग्रेस परेशान है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग का संवैधानिक कार्य है और यह प्रक्रिया होकर रहेगी। साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस कार्य में सहयोग की अपील की। उनका कहना था कि चुनाव आयोग अकेले यह कार्य नहीं करता, बल्कि सभी दलों के सहयोग से प्रक्रिया पूरी होती है और झारखंड में भी यह सफलतापूर्वक संपन्न होगी।

इस दौरान श्री मरांडी ने राज्य में जमीन विवाद के मुद्दे पर भी सरकार से नए सिरे से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य गठन से पहले और बाद में कई महापुरुषों ने जमीन और जल-जंगल-जमीन के अधिकार को लेकर संघर्ष किया है। यहां के आदिवासी और मूलवासी समुदाय की आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है।

श्री मरांडी ने कहा कि यदि खनिज संपदा के दोहन के लिए किसानों की जमीन ली जाती है तो बदले में उन्हें समान मात्रा में दूसरी जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए। सरकार इस दिशा में ठोस नीति बनाए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ वर्ग ऐसे भी हैं जो स्वेच्छा से जमीन देना या बेचना चाहते हैं, ऐसे में संतुलित और न्यायसंगत नीति बनाकर समाधान निकाला जा सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित