बांदा , जनवरी 15 -- उत्तर प्रदेश के बांदा में गुरुवार को शाम सेना दिवस के अवसर पर परम ऐतिहासिक भूरागढ़ दुर्ग में सैकड़ो नागरिकों ने दीप प्रज्वलित कर 3,300 शहीद राष्ट्रभक्तों को नमन कर याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर भारत माता की जय घोष के नारों से संपूर्ण दुर्ग प्रांगण राष्ट्रमय हो गया।

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, समाज सेवियों और बुद्धिजीवियों , गणमान्य नागरिकों व सैकड़ो पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। जहां वीर नारियों को साल, वस्त्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में पहुंचे बड़ी संख्या में लोगों ने दो अलग-अलग स्थापित दोनों शहीद स्मारकों में फूल, माला और रीथ अर्पित कर नमन किया और शाम को दीप प्रज्वलित कर देश के लिए शहीद 3,300 राष्ट्रभक्तों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

आज यहां आयोजित समारोह में एक राष्ट्र प्रेम पर आधारित विशाल कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें शामिल लगभग तीन दर्जन कवियों ने शहीदों के जुनून, शौर्य व आत्म बल से परिपूर्ण राष्ट्रप्रेम की सराहना की। इसके साथ ही कार्यक्रम में एक विशाल गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। जिसमें आजादी के दीवानों के उत्साह, बहादुरी आत्मबल ,धैर्य और उनके कृतित्व व व्यक्तित्व की विस्तृत चर्चा कर उन्हें याद किया गया। बाद में कार्यक्रम का समापन अमर शहीदों व भारत माता की जय के उद्घोष के उत्तेजित नारों के साथ संपन्न हुआ।

इतिहासकारों के अनुसार सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश कई जिलों से सैकड़ों की संख्या में बांदा पहुंचे राष्ट्रभक्तों ने अंग्रेजों से हुए भीषण युद्ध का सामना किया। युद्ध के दौरान भूरागढ़ दुर्ग पर अंग्रेजों द्वारा 3,300 राष्ट्र भक्तों को फांसी दी गई थी। आजादी के बाद इस ऐतिहासिक दुर्ग पर प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के पर्व पर शहीदों की याद में एक विशाल मेले के आयोजन की परंपरा शुरू हुई और श्रद्धांजलि कार्यक्रम किए जाने की शुरुआत हुई।

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