लखनऊ/बांदा , फरवरी 04 -- उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िला जेल से कुख्यात स्क्रैप माफिया व गैंगस्टर रविन्द्र सिंह (रवि काना) की संदिग्ध रिहाई ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है। मामले में जेल चौकी प्रभारी की शिकायत पर कोतवाली नगर थाने में जेल अधीक्षक, जेलर और अन्य अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 260C के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह धारा आरोपी की हिरासत में जानबूझकर की गई लापरवाही से संबंधित है।
वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है। मंगलवार को टीम ने बांदा मंडल जेल में करीब 5-6 घंटे तक दस्तावेज़, रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की गहन पड़ताल की।
पुलिस के मुताबिक, रवि काना कई गंभीर मामलों में वांछित है, जिनमें नोएडा के सेक्टर-63 थाने में दर्ज उगाही का केस भी शामिल है। वह वर्ष 2024 से अन्य मामलों में बांदा मंडल जेल में बंद था। उगाही प्रकरण में बी-वारंट के जरिए उसे कोर्ट में तलब किया गया था। जांच अधिकारी की रिमांड अर्जी पर 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई, लेकिन उसी शाम उसकी रिहाई हो गई, यही बिंदु अब जांच का केंद्र बना हुआ है।
घटना के बाद गौतम बुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने महानिदेशक कारागार और जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद डीजी (कारागार) पीसी मीणा ने जांच प्रयागराज रेंज के डीआईजी राजेश श्रीवास्तव को सौंपी है। इसी क्रम में बांदा जेल के जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया।
जबकि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जेल चौकी प्रभारी अनुराग पांडेय ने लिखित तहरीर दी, जिसके आधार पर जेल अधीक्षक अनिल गौतम, निलंबित जेलर विक्रम सिंह यादव और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। इसके बाद गठित विशेष टीम (एएसपी शिवराज के नेतृत्व में) ने जेल परिसर में लगे कैमरों की स्थिति, रिहाई से जुड़े काग़ज़ात और अन्य रिकॉर्ड खंगाले गए। जांच के दौरान 10 जेलकर्मियों और 9 बंदियों के बयान दर्ज किए गए, जबकि जेल अधीक्षक से अलग कमरे में विस्तृत पूछताछ की गई।
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