पटना , नवंबर 18 -- बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाला के एक मामले में मंगलवार को पटना की एक विशेष अदालत में पहला फैसला हुआ, जिसमें एक बैंक प्रबंधक समेत तीन लोगों को चार वर्षों तक के सश्रम कारावास की सजा के साथ 14 लाख रुपए तक का जुर्माना भी किया गया।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के विशेष न्यायाधीश सुनील कुमार ने बहुचर्चित सृजन घोटाला के इस मामले में निर्णय सुनाते हुए भागलपुर स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक के पूर्व सहायक प्रबंधक राकेश कुमार और लिपिक अजय कुमार पांडे तथा भागलपुर समाहरणालय के तत्कालीन प्रधान नजीर अमरेंद्र कुमार यादव को भारतीय दंड विधान एवं भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया।अदालत ने दोषी प्रधान नजीर को चार वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ 14 लाख रूपयों का जुर्माना किया। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर दोषी को दो वर्ष के कारावास की सजा अलग से भुगतनी होगी । दूसरी ओर दोषी सहायक बैंक प्रबंधक को अदालत ने तीन वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ चार लाख 75 हजार रूपयों का जुर्माना किया।

जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर दोषी को एक वर्ष चार माह की सजा अलग से भुगतनी होगी। इसी प्रकार अदालत ने दोषी बैंक लिपिक को तीन वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ छह लाख 25 हजार रुपए का जुर्माना किया । जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर दोषी को दो वर्ष चार महीने के कारावास की सजा अलग से भुगतान करनी होगी।

मामला भागलपुर में महिला सशक्तिकरण एवं सुदीढ़ीकरण की विभिन्न सरकारी योजनाओं की करोड़ों रुपयों की राशि का एक अपराधिक षड्यंत्र तथा सरकारी कर्मचारी की मिली भगत से सृजन नामक संस्था के माध्यम से धोखाधड़ी एवं जालसाजी कर गबन करने का है । मामले की प्राथमिकी सीबीआई ने आरसी 11ए/ 2017 के रूप में दर्ज की थी अदालत में यह मामला विशेष वाद संख्या 3/ 2018 के रूप में दर्ज था। सीबीआई ने जांच के बाद इस मामले में 16 फरवरी 2018 को आरोप पत्र दाखिल किया था।

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