बहराइच , जनवरी 14 -- उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में परिवार नियोजन एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के गैर-'उम्मीद' ब्लॉकों में भी परिवार नियोजन काउंसलिंग कॉर्नर (एफपीसीसी) की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में चित्तौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं हजूरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को दो नए एफपीसीसी का शुभारंभ किया गया।
यह पहल मोबियस फाउंडेशन, स्वास्थ्य विभाग एवं उम्मीद परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में की गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि इन काउंसलिंग कॉर्नरों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार नियोजन, गर्भनिरोधक विकल्पों, प्रजनन स्वास्थ्य तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य से संबंधित सही, वैज्ञानिक एवं विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना है।
सीएमओ ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और भ्रांतियों के चलते परिवार नियोजन सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पाता। एफपीसीसी के माध्यम से अब लोगों को उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा व्यक्तिगत परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे योग्य दंपतियों को समय पर सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
चित्तौरा और हजूरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर संचालित एफपीसीसी में ओपीडी में आने वाले 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग के योग्य दंपतियों को नियमित रूप से काउंसलिंग दी जाएगी। इससे परिवार नियोजन को लेकर सामाजिक झिझक व गलतफहमियों में कमी आने के साथ-साथ अनियोजित गर्भधारण पर रोक लगाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद है।
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