बहराइच , जनवरी 13 -- उत्तर प्रदेश के बहराइच में क्षय रोग (टीबी) की समय पर और सटीक पहचान के लिए ट्रूनेट तकनीक प्रभावी साबित हो रही है। पारंपरिक स्मियर माइक्रोस्कोपी की तुलना में ट्रूनेट जांच से टीबी की पहचान अधिक तेजी और विश्वसनीयता के साथ हो पा रही है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम.एल. वर्मा ने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार माइक्रोस्कोपी से जहां केवल 4.3 प्रतिशत मामलों में टीबी की पहचान हो सकी, वहीं ट्रूनेट जांच से 13.7 प्रतिशत मामलों में टीबी की पुष्टि हुई। इससे स्पष्ट है कि ट्रूनेट तकनीक अधिक संवेदनशील और सटीक है।

उन्होंने बताया कि जनवरी से नवंबर तक जिले में लगभग पांच लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान करीब 95 हजार एक्स-रे तथा 52 हजार से अधिक सैंपल ट्रूनेट मशीन से जांचे गए। उन्नत जांचों के परिणामस्वरूप जिले में नौ हजार से अधिक टीबी मरीजों की पहचान हुई, जिससे समय पर इलाज संभव हुआ और संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिली।

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