जालोर , जनवरी 23 -- राजस्थान में जालोर के कक्षा नौ के विद्यार्थी माधव जोशी एवं कक्षा आठ में पढ़ रही उनकी छोटी बहन अर्चना जोशी ने अवकाश के दिनों का सार्थक उपयोग करते हुए अपनी हस्तलिखित नोटबुक्स में 100 उपनिषदों का लेखन कर एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है।

सरकारी स्कूल में अध्यापक संदीप जोशी के पुत्र एवं जालोर के आदर्श विद्या मंदिर में अध्ययनरत माधव ने इस दौरान 65 उपनिषदों का लेखन किया वहीं उनकी छोटी बहन अर्चना ने 35 उपनिषदों को सुंदर एवं शुद्ध लेखन में संकलित किया। इन्हें उपनिषदों का लेखन करने में लगभग 100 दिन का समय लगा। भाई-बहन ने ग्रीष्मावकाश, दीपावली अवकाश एवं शीतकालीन अवकाश के दिनों का उपयोग कर यह उपनिषद लेखन किया। ये दोनों आदर्श विद्या मंदिर जालौर के विद्यार्थी हैं।

आदर्श विद्या मंदिर स्कूल के प्रधानाचार्य नितिन ठाकुर के अनुसार यह कार्य केवल नकल या अभ्यास भर नहीं रहा बल्कि इस प्रक्रिया में दोनों भाई-बहन को भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण निधि उपनिषदों के नाम, उनकी संरचना, विषय-वस्तु एवं दर्शन से जुड़ी अनेक नयी जानकारियां प्राप्त हुईं। उन्हें यह भी ज्ञात हुआ कि कुछ उपनिषद केवल एक-दो श्लोकों में सीमित हैं, जबकि कई उपनिषद अत्यंत विस्तृत हैं। विभिन्न उपनिषदों के अलग अलग शांतिपाठ की भी जानकारी मिली। इस दौरान संस्कृत भाषा के अनेक नवीन शब्दों को पढ़ने, समझने और आत्मसात करने का अवसर भी मिला।

ऐसे समय में परिवार एवं विद्यालय में इसकी चर्चा सुनकर इन बच्चों ने 100 अंक से जोड़कर कुछ सार्थक, सकारात्मक और यादगार कार्य करने का निश्चय किया। घर में 108 उपनिषदों की पुस्तक उपलब्ध थी। ऐसे में ग्रीष्म अवकाश में ही उन्होंने उपनिषदों का लेखन प्रारंभ कर दिया। जो दीपावली अवकाश और शीतकालीन अवकाश में भी जारी रहा। बच्चों द्वारा भारतीय संस्कृति, संस्कृत साहित्य और वैदिक ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं अध्ययन का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरक संदेश देता है कि अवकाश का उपयोग केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सृजन और साधना का माध्यम भी बन सकता है। नन्ही उम्र में किया गया यह बौद्धिक और सांस्कृतिक पुरुषार्थ निश्चित ही आने वाली पीढ़ियों के लिए 'ज्ञान से संस्कार' की प्रेरक मिसाल बनेगा।

उल्लेखनीय है कि कोरोना काल में 2020 में जब विद्यालय बंद थे, तब यही भाई-बहन कक्षा चार और तीन में अध्ययनरत रहते हुए संपूर्ण रामचरितमानस का हस्तलिखित लेखन अपनी नोटबुक्स के 2100 पेज में कर चुके हैं। यह निरंतर साधना, अनुशासन और भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति उनकी गहरी रुचि को दर्शाता है। देशभर में उनके कार्य की चर्चा और सराहना भी हुई थी और अनेक स्थानों पर विद्यार्थियों ने इसका अनुकरण भी किया था।

विद्यालय में अध्यनरत भाई बहन द्वारा 100 उपनिषद लेखन का कार्य करने की जानकारी मिलने पर आदर्श विद्या मंदिर जोधपुर प्रांत के प्रांत सचिव महेंद्र दवे, जालोर, जिला सचिव दिनेश गौड़ एवं जिला व्यवस्थापक जानकी प्रसाद गुप्ता ने इन बच्चों के घर जाकर दोनों विद्यार्थियों का अभिनंदन किया और उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

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