सुकमा , फरवरी 12 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने अपना अभियान तेज करते हुए सुकमा जिले के अलग-अलग इलाकों में नक्सलियों के आधार स्तम्भ माने जा रहे स्मारकों को सुरक्षाबलों ने ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई को नक्सल नेटवर्क के लिए मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक झटका माना जा रहा है।
सुकमा पुलिस से गुरुवार को मिली जानकारी के अनुसार,सबसे बड़ी कार्रवाई डब्बाकोन्टा इलाके के पिड़मेल गांव में हुई, जहां नक्सलियों द्वारा बनाया गया स्मारक सुरक्षाबलों के निशाने पर रहा। यह स्मारक वर्षों से नक्सली वर्चस्व एवं दहशत का प्रतीक बना हुआ था। सीआरपीएफ की 50वीं बटालियन के जवानों ने कमांडेंट प्रेमजीत कुमार के निर्देश पर मौके पर पहुंचकर बुलडोज़र से स्मारक को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस इलाके में नक्सली लंबे समय से अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए इस तरह के स्मारकों का सहारा लेते रहे हैं। सुरक्षाबलों ने इसे न सिर्फ ढहाया, बल्कि आसपास के इलाके में दबे होने के संदेह में कई स्थानों को भी खंगाला।
वहीं, गोगुंडा इलाके के एटापारा में नक्सलियों द्वारा निर्मित एक अन्य स्मारक को भी सुरक्षाबलों ने नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन और कोबरा बटालियन की 201 बटालियन की संयुक्त टीम द्वारा की गई। सुरक्षा कारणों को देखते हुए जवानों ने नियंत्रित ब्लास्ट के जरिए स्मारक को ध्वस्त किया। यह इलाका अत्यधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता है और यहां पहले भी सुरक्षाबलों को आईईडी ब्लास्ट का सामना करना पड़ा है। इस बार ऑपरेशन को अंजाम देने से पहले पूरे इलाके की घनी तलाशी ली गई और संभावित खतरों को निष्क्रिय किया गया।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सली इन स्मारकों का इस्तेमाल न सिर्फ प्रचार हथियार के तौर पर करते थे, बल्कि ये उनके शक्ति प्रदर्शन का भी जरिया थे। इन्हें गढ़वा या शहीद स्मारक नाम दिया जाता था, जहाँ वे अपने मृतकों को श्रद्धांजलि देने और नए सदस्यों को संगठित करने का काम करते थे।
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