जगदलपुर , दिसंबर 07 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में साक्षरता को जनआंदोलन का रूप देने वाली उल्लास महापरीक्षा में इस साल लगभग 36 हजार परीक्षार्थियों ने भाग लिया।

कलेक्टर हरीश एस और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस परीक्षा के लिए जिले में कुल 771 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जिनमें कई केंद्रों को आदर्श परीक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया गया था।

जिला जनसम्पर्क अधिकारी (पीआरओ) से मिली जानकारी के मुताबिक साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत 200 घंटे की पढ़ाई पूरी करने वाले असाक्षर नागरिकों ने इस महापरीक्षा में हिस्सा लिया, जबकि 200 घंटे से कम पढ़ाई वाले शिक्षार्थियों को 'स्वागत परीक्षा' में शामिल किया गया। जगदलपुर के चिलकुटी, बस्तर के मांदलापाल और राजपुर, तोकापाल के छापरभानपुरी एवं दरभा के डिलमिली को आदर्श केंद्र घोषित किया गया।

कार्यक्रम की सबसे प्रेरणादायक पहल रही जगदलपुर केंद्रीय जेल के 40 पुरुष और 30 महिला बंदियों की सहभागिता, जिन्होंने शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया। वहीं नक्सली पुनर्वास केंद्र आड़ावाल के 40 आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों ने भी परीक्षा देकर नई शुरुआत का संदेश दिया।

महापरीक्षा में कई हृदयस्पर्शी उदाहरण सामने आए। लोहंडीगुड़ा के धरमाऊर में पति-पत्नी हाड़ीराम कश्यप और हेमवती कश्यप, कुरंदी में दिव्यांग मंगली, बस्तर के मांदलापाल में सास-बहू और टाकरागुड़ा में देवरानी-जेठानी ने एक साथ परीक्षा देकर साक्षरता के महत्व को रेखांकित किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित