रायपुर , फरवरी 07 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में क्षेत्र के दोनों सांसदों को मंच पर उचित स्थान न देकर बस्तर की जनता और अस्मिता का अपमान करने का आरोप लगाया है।

कांकेर के सांसद भोजराज नाग और बस्तर सांसद महेश कश्यप मुख्य मंच पर नहीं देखे गए थे। कांग्रेस के अनुसार प्रोटोकॉल के लिहाज से दोनों ही सांसदों को मुख्यमंत्री मंच पर जगह दी जानी थी।

श्री बैज ने शनिवार रात कहा कि राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू की उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को मंच पर स्थान दिया गया, लेकिन बस्तर क्षेत्र के दोनों आदिवासी सांसदों - कांकेर से भोजराज नाग और बस्तर से महेश कश्यप - को मंच पर बैठने योग्य नहीं समझा गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार सांसदों को मंच पर स्थान दिया जाना चाहिए था और यह कदम न केवल दोनों निर्वाचित जनप्रतिनिधियों बल्कि सम्पूर्ण बस्तर की जनता के प्रति अनादर को दर्शाता है।

पीसीसी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बस्तर पंडुम के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करके अपनी ब्रांडिंग तो कर रही है, लेकिन साथ ही बस्तर के लोगों के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ भी कर रही है। उन्होंने कहा, "जिस पंडुम में बस्तर के जन प्रतिनिधि अपमानित हो रहे हैं, वहां आम बस्तरिया आदिवासी की क्या स्थिति होगी, यह समझा जा सकता है।"श्री बैज ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार को आदिवासी अस्मिता, धार्मिक आस्था और संस्कृति से कोई वास्तविक मतलब नहीं है। उनके अनुसार, यह सरकार बस्तर में प्राकृतिक संसाधनों की लूट से जनता का ध्यान भटकाने के लिए केवल राजनीतिक आयोजन कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया, "अपने ही दल के चुने हुए सांसदों को इस तरह अपमानित करके सरकार बस्तर की जनता को क्या संदेश देना चाहती है।"इस घटना को बस्तर के प्रति सरकार के रवैये की एक और कड़ी बताते हुए दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार न तो बस्तर की समृद्धि से जुड़ी है और न ही बस्तरिया संस्कृति से। उनका आरोप है कि सरकार केवल अपनी छवि निखारने के लिए आदिवासी समाज का बार-बार अपमान कर रही है।

कथित शराब घोटाले के आरोपी पूर्व आबकारी मंत्री ने राज्य छोड़ने से पहले आज अपने साक्षात्कार के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राज्य की धरा में आने पर उनका स्वागत किया और बधाई देते हुए कहा - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय आती हैं देश के शीर्ष पद हैं वो हम आदिवासियों का गौरव हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने सम्बोधन में कहा था - शिक्षा बेहद जरूरी है, यदि लगन से काम किया जाए तो किसी भी महिला या पुरुष के लिए सफलता की राह कठिन नहीं है। वो खुद ओडिसा के बहुत से छोटे से गांव से आती हैं लेकिन,आज भारत के राष्ट्रपति के तौर पर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं।

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