दंतेवाड़ा , जनवरी 28 -- बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से आयोजित जिला स्तरीय 'बस्तर पंडुम' का भव्य शुभारंभ माँ दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में हुआ। कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प एवं आदिवासी रीति-रिवाजों की जीवंत प्रस्तुतियों ने आकर्षण का केंद्र बनीं।
प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने आज (बुधवार) कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जहां कभी गोलियों की गूंज थी, आज वहाँ ढोल-मांदर की थाप है। उन्होंने बस्तर की बदलती तस्वीर एवं नक्सलवाद से मुक्ति की ओर बढ़ते क्षेत्र पर प्रसन्नता व्यक्त की। श्री कश्यप ने बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व पटल तक पहुँचाने पर जोर दिया तथा युवाओं से सोशल मीडिया के माध्यम से पारंपरिक गीतों का प्रचार करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर श्री कश्यप ने जिले को संपूर्णता अभियान 2.0 के सूचकांकों के संतृप्तिकरण हेतु शपथ भी दिलाई। विधायक चैतराम अटामी ने बताया कि यह आयोजन ब्लॉक स्तर से प्रारंभ होकर संभाग स्तर तक किया जाएगा, जो बस्तर के सर्वांगीण विकास को प्रदर्शित करेगा।
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