जगदलपुर , दिसंबर 07 -- इजरायल, फ्रांस, लातविया और ब्रिटेन से आए आठ सदस्यीय विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों, पारंपरिक खानपान और जनजातीय जीवनशैली को नज़दीक से समझने के उद्देश्य से क्षेत्र का दौरा शुरू किया है। दल ने अपनी यात्रा के पहले ही दिन बस्तर की विविध सांस्कृतिक परतों को देखने और समझने की उत्सुकता प्रकट की।

बस्तर ट्राइबल होमस्टे के संचालक एवं गाइड शकील रिजवी ने बताया कि विदेशी मेहमान साप्ताहिक हाट-बाजार, आदिवासी घरों, कारीगरों के कार्यस्थलों और स्थानीय कला केंद्रों में जाकर बस्तर के जनजातीय समाज की वास्तविक जीवन-पद्धति का अनुभव ले रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह टीम बस्तर की धुरवा, गोंड और भतरा जनजातियों की सामाजिक संरचना, परंपराओं, हस्तशिल्प निर्माण और खानपान को गहराई से समझने में विशेष रुचि दिखा रही है।"प्रतिनिधिमंडल में ब्रिटेन के कारलेट और निकोलस, लातविया की बाइबा कलनीना तथा इजरायल के अविदाद, अनत, आहरोन ग्रोनोट और शाबा शामिल हैं। टीम के सदस्यों ने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को भारतीय उपमहाद्वीप की "सबसे जीवंत और प्रामाणिक परंपराओं में से एक" बताते हुए कहा कि इस अनुभव से उनके अध्ययन और भविष्य के शोध को महत्वपूर्ण दिशा मिलेगी। लातविया की प्रतिनिधि बाइबा कलनीना ने बताया, "यहां संस्कृति सिर्फ दिखती नहीं, महसूस होती है। लोगों की जीवनशैली और परंपराओं का गहरा संबंध प्रकृति से है।"विदेशी मेहमान कांगेर घाटी क्षेत्र में ट्रेकिंग कर रहे हैं तथा दरभा और तोकापाल के पारंपरिक बाजारों का भ्रमण कर स्थानीय हस्तशिल्प और ग्रामीण बाजार व्यवस्था को समझ रहे हैं। इसके साथ ही वे आदिवासी भोजन की विविधता का स्वाद भी ले रहे हैं। सरसों भाजी, कलमल कांदा, बरहा कांदा, जोन्धरा पेज बास्ता, सुकसी, सूखा मशरूम और लाल चीटियों से बने पारंपरिक व्यंजनों ने टीम का विशेष ध्यान आकर्षित किया है।

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