जगदलपुर , अप्रैल 11 -- छत्तीसगढ़ में बस्तर की जनजातीय चिकित्सा परंपराओं के वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में नयी पहल की जा रही है। काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शोध परियोजना के तहत विभिन्न पदों पर आवेदन आमंत्रित किये गये हैं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार बस्तर क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों को वैज्ञानिक आधार पर परखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना शुरू की जा रही है। काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जगदलपुर द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, महाविद्यालय में प्रोजेक्ट रिसर्च फेलोऔर प्रोजेक्ट असिस्टेंट के पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गयी है। यह नियुक्ति भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भिलाई से संबद्ध एक प्रायोजित परियोजना के अंतर्गत की जाएगी, जो जनजातीय क्षेत्र उपयोजना के तहत संचालित है।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की अबूझमाड़िया और गोंड जनजातियों की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत अध्ययन करना है। "छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़िया और गोंड जनजातियों की आजीविका को सुदृढ़ बनाने के लिए उनकी स्वास्थ्य स्थितियों का मूल्यांकन तथा पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों का वैज्ञानिक सत्यापन" शीर्षक से संचालित इस शोध में पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को वैज्ञानिक कसौटी पर परखा जाएगा। इसके साथ ही जनजातीय समुदायों की आजीविका को सशक्त बनाने के उपायों पर भी कार्य किया जाएगा।
यह पहल बस्तर की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शोध के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पारंपरिक उपचार पद्धतियों के प्रभाव और उपयोगिता का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा, जिससे भविष्य में इनका व्यापक उपयोग संभव हो सके।
इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 25 अप्रैल निर्धारित की गयी है। उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए यह अवसर उपयोगी माना जा रहा है, जिससे वे जनजातीय विकास और वैज्ञानिक अध्ययन के क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी निभा सकेंगे।
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