बेंगलुरु , जनवरी 04 -- र्नाटक में बल्लारी पुलिस अधीक्षक पवन नेज्जूर के निलंबन के बाद आत्महत्या की कोशिश की खबरों से इलाके में चिंता फैल गयी थी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और गृह मंत्री जी परमेश्वर ने रविवार को इसे अफवाह बताया है।
श्री नेज्जूर ने भाजपा विधायक जी जनार्दन रेड्डी और कांग्रेस विधायक नारा भरत रेड्डी के समर्थकों के बीच झड़प होने से एक दिन पहले बल्लारी एसपी का पदभार संभाला था। झड़प में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की मौत हो गयी थी। इसके बाद उन्हें कानून-व्यवस्था बहाल करने में विफल रहने पर निलंबित कर दिया गया था। उनके करीबी अधिकारियों ने कहा कि श्री नेज्जूर ने अचानक निलंबन और 11 वर्षों के बाद पहली कार्यकारी पदस्थापना के दबाव से परेशान होकर तुमकुर जिले के बरागुर गांव में एक दोस्त के फार्महाउस में नींद की गोलियां खा ली।
मांड्या पुलिस अधीक्षक वी जे शोभारानी ने कहा, "यह अफवाह है। मैंने उनसे बात की है। वे आराम कर रहे हैं और ठीक हैं। कृपया इन पर विश्वास न करें और न ही उन्हें फैलाएं।" पूर्वी क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक रविकांते गौड़ा ने भी इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि श्री नेज्जूर ने तनाव के कारण नींद की गोलियां ली थीं, न कि जान लेने के लिए। वह अपने परिवार के साथ ठीक हैं।
गृह मंत्री परमेश्वर ने मीडिया को बताया, "श्री नेज्जूर की स्थिति जानने के लिए भारतीय पुलिस सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी को फोन किया था। वह निलंबन और अन्य मुद्दों के कारण अवसाद में हो सकते थे, लेकिन वह ठीक हैं।"इस बीच, विपक्षी नेताओं ने श्री नेज्जुर को पदभार संभालने के तुरंत बाद निलंबित करने के लिए कांग्रेस सरकार की आलोचना की है। विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा, "घटना से ठीक दो घंटे पहले पुलिस अधीक्षक ने कार्यभार संभाला था। नये जिले को समझने में कम से कम 15 से 20 दिन लगते हैं। सरकार ने इसके बावजूद उन्हें बलि का बकरा बना दिया।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के बढ़ते दबाव के कारण अधिकारी बहुत ज्यादा तनाव में हैं। अपने तर्क के समर्थन में उन्होंने पिछले समय में 12 पुलिस अधिकारियों की आत्महत्याओं का हवाला दिया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित