बरेली , अप्रैल 28 -- उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में दो बहनों ने खुद को फर्जी आईएएस अधिकारी बताकर बेरोजगार युवाओं से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठग लिए। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार फाइक एन्क्लेव निवासी प्रीति लॉयल ने बारादरी थाना पुलिस को तहरीर देकर बताया कि ग्रीन पार्क निवासी शिखा पाठक ने उनसे संपर्क बढ़ाया और बताया कि उसकी बहन डॉ. विप्रा शर्मा आईएएस अधिकारी हैं, जो गजरौला में एडीएम वित्त के पद पर तैनात हैं।

शिखा ने दावा किया कि उसकी सचिवालय में अच्छी पहचान है और वह कई लोगों की नौकरी लगवा चुकी है। उसकी बातों में आकर प्रीति ने अपनी कॉलोनी निवासी आदिल खान, सतीपुर निवासी संतोष कुमार तथा बारादरी निवासी मुशाहिद को भी इस संबंध में जानकारी दी।

इसके बाद सभी ने सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद में शिखा के माध्यम से विप्रा से मुलाकात की और उसके कहने पर कई किश्तों में लाखों रुपये दे दिए। दोनों बहनों के साथ दीक्षा पाठक का नाम भी इस ठगी में सामने आया है। आरोप है कि दोनों बहनों ने पीड़ितों को उत्तर प्रदेश शासन की ओर से कथित रूप से जारी फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए और कंप्यूटर ऑपरेटर समेत अन्य पदों पर नियुक्ति का भरोसा दिलाया। जब पीड़ित ज्वॉइनिंग के लिए विभूतिखंड, लखनऊ पहुंचे, तब पता चला कि इस प्रकार की कोई भर्ती निकली ही नहीं थी।

बारादरी थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रीति लॉयल समेत चार लोगों ने संयुक्त रिपोर्ट दर्ज कराते हुए करीब साढ़े 11 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों बहनों समेत तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कूटरचित दस्तावेज, 10 चेकबुक, चार मोबाइल फोन, घटना में प्रयुक्त महिंद्रा एक्सयूवी-700 कार, दो लैपटॉप, 4.50 लाख रुपये नकद, तीन पासबुक बरामद की हैं। साथ ही विभिन्न खातों में जमा 55 लाख रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित ठगी रैकेट हो सकता है और जांच के दौरान अन्य पीड़ितों के सामने आने की भी संभावना है।

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