मथुरा , जनवरी 11 -- ब्रज की पावन धरा बरसाना स्थित माता जी गौशाला के विशाल परिसर में 'श्री गिरधरलाल जी का ब्याहुला उत्सव' अत्यंत भव्यता के साथ शुरू हुआ।
राधा रानी के गगनभेदी जयकारों और संतों की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया है। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक विवाह उत्सव का साक्षी बनने के लिए बरसाना में डेरा डाले हुए हैं। संतों का सानिध्य और दीप प्रज्वलनउत्सव का विधिवत शुभारंभ मान मंदिर के संस्थापक और सुप्रसिद्ध संत रमेश बाबा महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि बरसाना श्रीजी की कृपा की खान है और यहाँ गिरधरलाल का ब्याहुला उत्सव होना ब्रज के लिए महान गौरव की बात है। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए सभी भक्तों को लाड़ली जी का आशीर्वाद प्रदान किया।
प्रसिद्ध कथा प्रवक्ता इंद्रेश उपाध्याय महाराज के मुखारविंद से ठाकुर जी के विविध उत्सवों और लीलाओं का वर्णन सुनकर भक्त भाव-विभोर हो उठे। प्रथम दिवस पर निकुंज से अष्टसहचरी वृंद एवं श्रीजी के प्राकट्य की लीला का मंचन किया गया। जैसे ही पंडाल में "जनी वृषभान की लली" के भजन गूंजे, श्रद्धालु अपनी सुध-बुध खोकर झूमने लगे। इंद्रेश महाराज ने कहा कि यह हमारा परम सौभाग्य है कि किशोरी जी ने अपनी धरा पर इस उत्सव की सेवा का अवसर प्रदान किया।
मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि बरसाना साक्षात ठाकुर जी की सनातन ससुराल है और यहाँ ब्याहुला उत्सव का आयोजन होना यह दर्शाता है कि आज गिरधरलाल अत्यंत प्रसन्न हैं। उन्होंने 70 हजार गायों की सेवा स्थली 'माता जी गौशाला' के महत्व को भी रेखांकित किया।
भागवत भास्कर श्री कृष्ण शास्त्री ठाकुर जी ने इस उत्सव को ब्रज संस्कृति का जीवंत स्वरूप बताया। कार्यक्रम में विनोद बाबा महाराज, पंडित बाबा जी, सर्राफा मोहित अग्रवाल और रोहित रिछारिया सहित कई विरक्त संत और गणमान्य जन उपस्थित रहे। यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ब्रज की अटूट परंपरा और प्रेम का प्रतीक बन गया है।
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