पालनपुर , दिसंबर 06 -- केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को यहां कहा कि बनास डेयरी एशिया की सबसे बड़ी दुग्ध उत्पादक डेयरी बन चुकी है।

श्री शाह ने कहा कि इसमें गलवा काका का बड़ा योगदान है। वह ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनके हृदय में केवल किसान हित की भावना बसती थी। वर्ष 1960 में वडगाम और पालनपुर सिर्फ दो तहसीलों के मात्र आठ गांवों की दूध मंडलियों से शुरू हुई यह यात्रा आज 24 हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गयी है। उनके द्वारा शुरू की गयी परंपरा का मूल मंत्र बहुत सरल था, "हमारे पास रुपये तो कम हैं, लेकिन हम खूब सारे लोग हैं।" बहुत सारे लोगों द्वारा थोड़े-थोड़े रुपए इकट्ठा करके बड़ा काम करने का उनका विचार एक विशाल वटवृक्ष बन गया है, जो देश ही नहीं, विश्व के सभी सहकारी आंदोलनों को प्रेरणा दे रहा है।"केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जो संविधान इस देश को दिया, उसके बल पर दलित, गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग भी सम्मानपूर्ण जीवन जी सकें, ऐसी मजबूत व्यवस्था खड़ी हुई है। वह बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किये जा रहे कार्यक्रमों के तहत गुजरात में चल रही एक विशाल पदयात्रा का समापन समारोह भी आज ही है। किसान और सहकारिता का मूल विचार सरदार साहब का ही था। गुजरात ने उसे अपनाया और आज वह विचार एक विशाल वटवृक्ष बन गया है।

श्री शाह ने कहा कि आज यहां कई नयी शुरुआतें हुई हैं, जिसके तहत बायो सीएनजी प्लांट और मिल्क पाउडर प्लांट का उद्घाटन और अत्याधुनिक प्रोटीन प्लांट एवं हाई-टेक ऑटोमैटिक पनीर प्लांट का लोकार्पण हुआ। बनास डेयरी ने सर्कुलर इकोनॉमी के जो अभिनव प्रयोग किये हैं, परामर्शदात्री समिति के सदस्य सांसदों को उससे अवगत कराया जाएगा। अभी तक अमूल के नेतृत्व में गुजरात की डेयरियां दूध इकट्ठा करती थीं, प्रोडक्ट बनाती थीं, बेचती थीं और जो लाभ होता था, उसे सीधे बहनों और किसानों के बैंक खाते में डाल देती थीं।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा, " इस मामले में हम दुनिया में सबसे आगे रहे हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि हम डेयरी को पूरी तरह सर्कुलर इकोनॉमी बनायें। गाय-भैंस का एक ग्राम गोबर भी बर्बाद न हो, उससे जैविक खाद बने, बायो-गैस बने, बिजली बने और उससे जो कमाई हो, वह भी वापस किसान के पास आये।"बनास डेयरी ने जो बायो सीएनजी प्लांट की परंपरा खड़ी की, वह देश भर की सहकारी समितियों के लिए आदर्श बनेगी। दुनिया में ऐसे बहुत-से हाई-वैल्यू डेयरी प्रोडक्ट हैं जो अभी भारत में नहीं बन रहे। वह आज ही अमूल के चेयरमैन को एक पूरी लिस्ट दे रहे ताकि उन प्रोडक्ट्स के उत्पादन का काम तुरंत शुरू हो।

उन्होंने कहा कि इन उत्पादों की कीमत बहुत अधिक मिलती है और विश्व बाजार में इनकी भारी मांग है। अगर हम सिर्फ दही, घी, पनीर बनाने की बजाय इन हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर ध्यान देंगे, तो हमारे किसान भाइयों-बहनों को कई गुना अधिक लाभ होगा।

श्री शाह ने कहा, " हमें अब डेयरी के साथ-साथ बायोगैस बनाने की शुरुआत करनी है, बायो-सीएनजी बनाने की शुरुआत करनी है। अब समग्र भारत की को-ऑपरेटिव डेयरियाँ पशु आहार भी बाजार से नहीं खरीदेंगी। उसे भी को-ऑपरेटिव स्तर पर ही बनाया जाएगा और पशु आहार बनाने से जो लाभ होगा, वह भी सीधे हमारी बहनों के बैंक खाते में पहुंचेगा। इस पूरी व्यवस्था के लिए टेक्नोलॉजी भी चाहिए, वित्त भी चाहिए, यह सब केन्द्र सरकार ने तैयार कर दिया है।

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