हल्द्वानी , मार्च 13 -- उत्तराखंड के बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने शुक्रवार को यहां निलियम कॉलोनी में अपने आवास में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक को लेकर कहा कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है, यह आदिकाल से आदि शंकराचार्य ने यह व्यवस्था बनाई है।
श्री द्विवेदी ने कहा कि सिर्फ इसकी समीक्षा की गयी है, जितने भी धार्मिक अनुष्ठान, प्रतिष्ठान हें वहां गैर-सनातनियों काे गर्भगृह और मंदिर परिसर में प्रवेश वर्जित रहेगा। उन्होंने कहा कि जब हम बदरीनाथ और केदारनाथ चार धाम की यात्रा की बात करते हैं यह भारत की आत्मा है और देश दुनिया से लाखों तीर्थ यात्री दर्शनार्थ यहां पहुंचते हैं। यह लोगों आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म आज पूरी दुनिया में एक विराट स्वरूप है, यह हर देश दुनिया में सनातन धर्म के प्रति लोगों का आकर्षण है, लोग उसको समझाना चाहते हैं, सनातन धर्म पर अनुसंधान कर रहे हैं और तमाम लोग सनातन धर्म को मानते हैं और उसकी तरफ उनकी आस्था और विश्वास है।
उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर और गर्भगृह में सनातनियों को ही प्रवेश दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह का पिछले दो-चार वर्षो में विशेष समुदाय के द्वारा अवव्यवस्था फैलाने की कोशिश की गई है उसका सरकार ने कड़ाई से जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वातावरण को पूरी तरह से ठीक करने का कार्य किया है।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समित के अध्यक्ष ने कहा कि स्थानीय हक-हकूकधारियों, तीर्थ पुरोहितों और लंबे समय से यात्रा से जुड़े लोगों की भी यह मांग थी कि चार धाम की पौराणिकता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए पुरानी व्यवस्था को स्पष्ट रूप से लागू किया जाए। इसी वजह से 10 मार्च को हुई बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि गैर-सनातनियों का गर्भगृह और मंदिर परिसर में प्रवेश वर्जित रहेगा।
श्री द्विवेदी ने कहा कि ध्वनि मत से यह निर्णय पारित हुआ है कि किसी भी गैर सनातनी का पूर्ण तरीके तरह गर्भगृह और मंदिर परिसर में वर्जित किया जाए। उन्होंने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं, पर्यटन मनोरंजन से जुड़ा होता है, जबकि तीर्थाटन आस्था और श्रद्धा से जुड़ा विषय है। ऐसे में बदरीनाथ-केदारनाथ धाम की धार्मिक पवित्रता और पहचान को बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
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