भोपाल , फरवरी 18 -- लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक रघु ठाकुर ने मध्यप्रदेश सरकार के बजट को प्रचारात्मक और कर्ज बढ़ाने वाला बताते हुए कहा कि यह बजट उस ढोल के समान है जिसकी आवाज तो आकर्षक लगती है, किंतु भीतर से वह खोखला होता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नए वित्तीय वर्ष में 54 हजार 448 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है, जबकि मध्यप्रदेश पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। बजट की बड़ी राशि कर्ज के ब्याज भुगतान में चली जाएगी। उनका कहना था कि सरकार की तथाकथित जनकल्याणकारी योजनाएं वास्तविक आवश्यकता की तुलना में अत्यंत सीमित हैं।

नि:शुल्क उपचार योजना के तहत प्रति मरीज पांच लाख रुपये की दर से इलाज के लिए मात्र 2500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उनके अनुसार इस राशि से पूरे वर्ष में लगभग 50 हजार लोगों को ही लाभ मिल सकेगा, यानी प्रतिदिन औसतन 150 लोगों को ही उपचार उपलब्ध होगा, जबकि प्रदेश की आबादी लगभग नौ करोड़ है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। छात्रवृत्ति, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में भी केवल निरंतरता रखी गई है, कोई विशेष विस्तार नहीं किया गया।

सिंचाई के क्षेत्र में 7.50 लाख हेक्टेयर (लगभग 20 लाख एकड़) भूमि में सिंचाई वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है, किंतु सिंचाई और कृषि के लिए 88 हजार 900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें से लगभग 50 प्रतिशत स्थापना व्यय में चला जाएगा। वास्तविक विकास कार्यों के लिए करीब 44 हजार करोड़ रुपये ही उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या इतनी राशि से घोषित लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा।

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए 2364 करोड़ रुपये के प्रावधान का स्वागत करते हुए भी उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि उत्पादन वृद्धि किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी। 3000 गौशालाओं के आधुनिकीकरण की घोषणा पर भी उन्होंने स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने छात्रों को साइकिल योजना और प्रत्येक जिले में खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के प्रस्ताव को सकारात्मक बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से इस मांग को उठाती रही है। एक लाख सोलर पंप लगाने की योजना को भी कृषि हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।

फसल बीमा के लिए 1299 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रदेश की आवश्यकता और पिछले वर्षों की फसल क्षति को देखते हुए अपर्याप्त बताया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न महानगरों में आयोजित निवेशक सम्मेलनों की उपलब्धियों का कोई स्पष्ट उल्लेख बजट में दिखाई नहीं देता।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों पूर्व कर्जमुक्त प्रदेश का वादा किया गया था, किंतु कर्ज निरंतर बढ़ता जा रहा है। अंत में उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बजट 'कर्ज लो और खर्च करो' की नीति पर आधारित प्रतीत होता है।

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