पटना , मार्च 18 -- बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है।
श्री पांडेय ने आज बयान जारी कर कहा कि स्वस्थ बिहार की परिकल्पना बच्चों के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास से ही पूरी हो सकती है। इसे लेकर सरकार बच्चों को निरंतर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रही है। इसी दिशा में राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राज्य के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की आंखों की जांच की जा रही है। इसके लिए विशेष नेत्र जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों के सिविल सर्जन को निर्देशित किया गया है।
श्री पांडेय ने कहा कि स्कूल आई स्क्रीनिंग अभियान को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा रहा है। इसके लिए जिले के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य संस्थानों के नेत्र सहायक द्वारा अपने प्रखंड के सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल हेल्थ टीम से समन्वय कर विद्यालयों में जाकर बच्चों की आंखों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में दृष्टि दोष की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। स्कूल आई स्क्रीनिंग राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मंत्री श्री पांडेय ने कहा कि जांच के दौरान जिन बच्चों में दृष्टि दोष पाए जाते हैं, उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में विस्तृत जांच के लिए भेजा जा रहा है। इसके बाद दृष्टि दोष से प्रभावित बच्चों को उनके पावर के अनुसार निःशुल्क चश्मा उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में राज्य में लगभग 3,57,544 सरकारी स्कूल के बच्चों की नेत्र स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें नेत्र दोष वाले बच्चों को 14,467 निःशुल्क चश्मों का वितरण भी किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल से बच्चों की पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में मदद मिल रही है।
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